देश का पच्चीस फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है। करीब तैंतीस करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास पीने के लिए, खेतों में मुरझा रही फसलों को बचाने के लिए और जानवरों को जिंदा रखने के लिए पानी नहीं है। उत्तर प्रदेश की सबसे बुरी दशा है, जिसके 50 जिले सूखे की गिरफ्त में हैं। सरकार सूखे के असर को लगातार काम करके बता रही है। सर्वोच्च न्यायालय के सामने भी उसके वकील ने कहा कि प्रभावित लोगों की संख्या तैंतीस करोड़ से कम ही होगी। इस पर न्यायालय ने डांटकर कहा कि संख्या कहीं ज्यादा है, क्योंकि कई राज्य सूखे से प्रभावित हैं, जिन्हें सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया।
तेलंगाना के नलगोंडा जिले के राजापेटा गांव में पिछले दिनों कनकय्या नाम के किसान ने अपने खेत में आत्महत्या कर दी। उसकी चौथी बोरिंग सूख गई थी। उसकी तीन भैंस चारे के अभाव में मर गई थी। उसकी पत्नी के पास अब भीख मांगने के अलावा कोई चारा नहीं है, क्योंकि गांव के तमाम खेत सूखे पड़े हैं। तेलंगाना में पिछले तीन वर्षों में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 2,100 है, जबकि मुआवजा सिर्फ 300 परिवारों को मिला है। केंद्र सरकार कह रही है कि मनरेगा का पैसा उन्होंने बढ़ा दिया। सरकारी वकील सर्वोच्च न्यायालय को बताता है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लोगों को सौ दिन का काम दिया गया है, पर प्यास से फट रही धरती पर ये दावे झूठे मालूम हो रहे हैं।
महाराष्ट्र के लातूर में ट्रेन से पानी पहुंचाया गया, जबकि सूखा तो पूरे मराठवाड़े में है। बगल के बीड जिले की एक लड़की योगिता देसाई पेचिस से पीड़ित थी, पर चिलचिलाती धूप में उसे पांच सौ गज दूर हैंडपंप से पानी भरने जाना पड़ा। जब वह पंप पर पांचवीं बार पहुंची, तो वहीं बेहोश हो गई, फिर उसने दम तोड़ दिया।
सरकार में बैठे लोग सूखे के मामले में संवेदनहीन भी हैं। जिस कर्नाटक में डेढ़ वर्ष में 1,012 किसान आत्महत्या कर चुके हैं, वहां के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जब सूखाग्रस्त जिलों का दौरा करने निकले, तो उन्हें धूल से बचाने के लिए रास्तों में कई हजार लीटर पानी छिड़का गया। महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे मंत्री एकनाथ खडसे के आगमन के लिए बने हेलीपैड पर हजारों लीटर पानी बहाया गया, और लातूर में राहत कार्यों का जायजा लेने पहुंची राज्यमंत्री पंकजा मुंडे ने सेल्फी खींचकर फेसबुक पर पोस्ट की। राजस्थान की मुख्य्मंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य में आईपीएल के तीन मैच खेलने की अनुमति दे दी है, जबकि उनके राज्य में 19 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने तो यहां तक कह डाला कि सूखा एक ऐसी चीज है, जिससे निपटने के लिए कोई योजना बन ही नहीं सकती। सूखे का यह तीसरा साल है। और महीनों से कहा जा रहा है कि इस साल भीषण गर्मी के साथ भयानक सूखा भी पड़ेगा। मंत्री जी की योजना न बनाने का खामियाजा सूखा पीड़ित लोग भुगत रहे हैं। न उन्हें काम मिला है, न सस्ता राशन, न ही पशु चारा। उमा भारती जी के राज्य में सूखा भी पड़ा है और अर्धकुंभ भी हो रहा है। उज्जैन की क्षिप्रा नदी भी सूखी पड़ी है, पर मुख्यमंत्री उसमें एक महीना तक नहाने के लिए पांच करोड़ लोगों को निमंत्रण दे रहे हैं। नर्मदा का पानी बड़े-बड़े पाइपों के जरिये उज्जैन तक पहुंचाया जा रहा है। योजना और नीयत हो, तो प्यासी धरती और प्यासे किसानों तक भी पानी पहुंचाया जा सकता है।
-लेखिका माकपा पोलितब्यूरो की सदस्य हैं