डीएनए डायनासोर सहित इस पृथ्वी पर रहने वाले हरेक जीव की कोशिकाओं में रहता है। हर किसी का डीएनए दूसरे से अलग होता है, जो उसकी कई विशेषताओं को निर्धारित करता है। ध्यान रहे, जीवों के नरम हिस्सों, जैसे अंगों, रक्त वाहिकाओं, तंत्रिकाओं, मांसपेशियों एवं वसा में डीएनए को ढूंढना आसान है। लेकिन डायनासोर के नरम हिस्से बहुत पहले खत्म हो गए। वे या तो विघटित हो गए या दूसरे डायनासोर द्वारा खा लिए गए। डायनासोर के जीवाश्म उन प्रागैतिहासिक जानवरों के अवशेष हैं। ये जीवाश्म डायनासोर के कथित कठोर हिस्सों-हड्डियों, दांत एवं खोपड़ी से प्राप्त हुए हैं। पर्याप्त जीवाश्म से वैज्ञानिक डायनासोर का कंकाल तैयार कर सकते हैं, जिन्हें आप संग्रहालय में देख सकते हैं। लेकिन डायनासोर के जीवाश्म से जब वैज्ञानिक डीएनए प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें समस्या होती है। डीएनए के अणु अंततः नष्ट हो जाते हैं।
हाल के अध्ययनों में पाया गया कि सत्तर लाख वर्ष के बाद डीएनए खराब होकर अंततः विघटित हो जाते हैं। आखिरी डायनासोर क्रेटेशियस काल के अंत में मरा था। यह 6.5 करोड़ साल से भी ज्यादा पुरानी बात है। यानी आज अगर जीवाश्म से डायनासोर का डीएनए प्राप्त करने की कोशिश की जाए, तो वह बेकार होगा, क्योंकि वह काफी पहले नष्ट हो चुका होगा। यानी आज सर्वोत्तम तकनीक का उपयोग करके भी डीएनए से डायनासोर बनाना संभव नहीं है।
डायनासोर का डीएनए खोजने में काफी देर हो चुकी है, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने ऐसा कुछ प्राप्त किया है, जो उतना ही दिलचस्प है। उन्होंने निएंडरथल और अन्य प्राचीन स्तनधारियों, जैसे कि वूली मैमथ (मध्य प्लेइस्टोसिन युग के दौरान साइबेरिया में पाए जाने वाले रोएंदार हाथी) के जीवाश्मों में डीएनए के टुकड़े खोजे। कल्पना कीजिए कि भविष्य में कभी यदि शोधकर्ता किसी तरह डायनासोर के डीएनए के टुकड़े लेकर आ भी गए, तो क्या होगा? केवल डीएनए के टुकड़ों से वैज्ञानिक डायनासोर नहीं बना सकते हैं। उन्हें जीवित जीव का निर्माण करने के लिए उन टुकड़ों को आधुनिक पशु के डीएनए के साथ संयोजित करना होगा। (कन्वर्सेशन से )