विचारणीय है कि 140 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले भारत से ऐसे नए विचार, नवाचार और व्यवहार बाहर क्यों नहीं आते हैं? हमारा रचनात्मक जगत पश्चिमी विश्व के अंधे अनुकरण में किस कदर डूबा है, इसकी बानगी अभी हाल ही में एक विवादित कॉमेडी शो के दौरान एक अत्यंत अशोभनीय टिप्पणी के साथ उजागर हुई, जहां यह संवाद भी पश्चिमी टीवी शो की नकल कर के बोला गया था। स्टूडियो घिबली की फिल्में, जैसे-माई नेबर तोतोरो (1988), स्पिरिटेड अवे (2001), प्रिंसेज मोनोके (1997) और ऑल्स मूविंग कासल (2004), जापानी संस्कृति, मिथकों और परंपराओं को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती हैं। स्पिरिटेड अवे ने 2003 में ऑस्कर जीता, जो किसी जापानी एनीमे के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। इसने जापान को वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक नेतृत्व की स्थिति में खड़ा किया। इन फिल्मों में दिखाए गए पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और पारिवारिक मूल्यों ने दुनिया भर में दर्शकों के दिलों को छुआ और जापानी दृष्टिकोण को व्यापक स्वीकृति दिलाई।
जापान ने एनीमे के जरिये सॉफ्ट पावर को रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया है। सॉफ्ट पावर का तात्पर्य है कि किसी देश की सांस्कृतिक, राजनीतिक और वैचारिक ताकतें, जो दूसरों को आकर्षित व प्रभावित कर सकें। 2023 में वैश्विक एनीमे बाजार का मूल्य लगभग 26.89 अरब डॉलर था, और यह 2030 तक 52.97 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। नेटफ्लिक्स जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर 100 से अधिक जापानी एनीमे सीरीज उपलब्ध हैं। स्टूडियो घिबली की सभी फिल्में नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध कराए जाने के बाद, उनकी वैश्विक लोकप्रियता में 200 फीसदी से अधिक वृद्धि हुई। तोतोरा फॉरेस्ट और स्पिरिटेड अवे से प्रेरित लोकेशंस जापान में पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। एनीमे के माध्यम से लाखों लोगों ने जापानी भाषा और संस्कृति को सीखने में रुचि दिखाई है। जापानी सरकार ने एनीमे को कूल जापान इनिशिएटिव का हिस्सा बनाया है, जिसमें 2025 तक दस खरब येन का निवेश किया गया है।
1980 के दशक के अंत में रामायण से प्रभावित होकर जापानी निर्देशक युगो साको ने प्रसिद्ध भारतीय एनिमेटर राम मोहन के साथ इस महाकाव्य को एनीमे शैली में निर्देशित करने का निर्णय लिया। इस इंडो-जापानी संयुक्त निर्माण का नाम रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम था। लगभग 1.3 करोड़ डॉलर के बजट से निर्मित यह फिल्म पांच वर्षों में पूरी हुई और 1992 में रिलीज हुई। इस फिल्म में भगवान राम की कहानी को अद्भुत दृश्यों, विस्तृत पात्र-डिजाइन, और संगीतकार वनराज भाटिया द्वारा तैयार किए गए एक प्रभावशाली बैकग्राउंड संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया। इसे हिंदी, अंग्रेजी और जापानी सहित 20 से अधिक भाषाओं में डब किया गया और यह केवल भारत और जापान में ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी दर्शकों तक पहुंची। इस फिल्म की स्थायी विरासत यह दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक भारतीय महाकाव्य आधुनिक कहानी कहने के माध्यमों के साथ, सांस्कृतिक और भाषाई बाधाओं को पार कर सकते हैं और भारत की आध्यात्मिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर सकते हैं।
भारत जापान की ‘कूल जापान इनिशिएटिव’ से प्रेरणा लेकर ‘कूल इंडिया’ जैसे अभियान शुरू कर सकता है, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत, कला रूपों और नवाचारों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने पर केंद्रित हो। इस पहल के तहत भारतीय पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और इतिहास पर आधारित उच्च-गुणवत्ता वाली डिजिटल सामग्री, जैसे एनिमेटेड शृंखला, डॉक्यूमेंटरी और वर्चुअल रियलिटी अनुभव, वैश्विक दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं। इस प्रयास को और मजबूत बनाने के लिए भारत प्रमुख विदेशी शहरों में सांस्कृतिक केंद्र और उत्कृष्टता के केंद्र स्थापित कर सकता है, जहां भारतीय कला, शिल्प, प्रदर्शन और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए। आधुनिक मीडिया तकनीकों को भारत की समृद्ध विरासत के साथ जोड़कर, भारत एक वैश्विक सॉफ्ट पावर के रूप में अपनी पहचान बना सकता है, ठीक वैसे ही जैसे जापान ने अपनी एनीमे और डिजाइन इंडस्ट्री के माध्यम से किया है।