अगर एक बिगड़ैल बैल अचानक क्रॉकरी की दुकान में घुस जाए, तो क्या होगा? वह तोड़-फोड़ करेगा, जिससे क्रॉकरी इधर-उधर गिरने लगेगी। ऐसे में दुकान का मालिक क्या करेगा? वह विवश होकर बैल के थकने का इंतजार करेगा, उसके विध्वंस को रोकने की कोशिश करेगा और स्वयं बाहर निकल जाएगा! लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो वह विशेषज्ञों की सलाह ले सकता है। वे बैल को शांत करने के लिए इंजेक्शन लगाकर उसे बाहर ले जाएंगे। मलबा हटाने और टूटे हुए टुकड़ों को जोड़ने के लिए काफी प्रयासों की जरूरत होगी, कुछ टुकड़े तो जुड़ ही नहीं सकते, वे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
अपने देश को महान बनाने के लिए दो हफ्ते का वक्त किसी नेता के लिए पर्याप्त नहीं होता। यह नई संस्थाएं बनाने और उपलब्ध प्रतिभाओं को नई दिशा, उर्जा, विशेषज्ञता और कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए बहुत कम समय होता है। लेकिन दो हफ्ता सदियों से स्थापित मानदंडों और संधियों को नष्ट करने, दशकों से जारी रिश्तों को खराब करने और चिंता, घबराहट, अनिश्चितता और टकराव का अनिश्चित माहौल पैदा करने के लिए काफी होता है, जिसका लाखों लोगों के सामान्य जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। डोनाल्ड ट्रंप ने यही किया है!
विडंबना यह है कि उन्हें इसके बारे में कोई हिचक नहीं है। नए कार्यकारी आदेश जारी करना उनकी दिनचर्या बनती जा रही है। वह अपने चुनावी वायदे को पूरा करने का दावा करते हैं। लेकिन उन्हें समझने की जरूरत है कि अब वह रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार नहीं हैं! वह अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति हैं! पूरी दुनिया की नजर उन पर है।
अमेरिका और बाहर के कई पर्यवेक्षकों को नहीं लगता था कि वह चुनाव जीतेंगे, लेकिन उन्होंने जीता। और कई लोग सोचते थे कि पद संभालने के बाद वह विभाजनकारी चुनावी बयानबाजी से परहेज करेंगे और कामकाज पर ध्यान देंगे-सभी अमेरिकियों को एकजुट करने के लिए मेहनत करेंगे और अमेरिका के मित्र देशों को आश्वस्त करेंगे कि अमेरिका अपनी नेतृत्वकारी भूमिका नहीं छोड़ेगा, न ही दीवारों से घिरा किला बनेगा। दुर्भाग्य से पिछले दो हफ्तों में दुनिया ने ट्रंप की धमकी देने, दुख देने, विरोध करने, बांटने और अतिवादी कदम उठाने की अटूट क्षमता देखी है। जाहिर है, अमेरिका मुश्किल वक्त में है और इसलिए दूसरे देश भी।
ट्रंप ने ट्वीट किया कि अगर मैक्सिको सीमा पर प्रस्तावित दीवार बनाने के लिए भुगतान करने को तैयार नहीं होता, तो वहां के राष्ट्रपति को आने की जरूरत नहीं है और उन्हें फोन पर धमकी दी कि अमेरिका बुरे लोगों का ख्याल रखना जानता है, अगर वह ऐसा नहीं करता। पड़ोसी से बेहतर रिश्ते बनाए रखने के लिए यह अच्छी रणनीति नहीं है। सात मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों पर 90 दिनों, नए शरणार्थियों के लिए 120 दिनों और सीरियाइयों के लिए अनंतकाल तक अमेरिका प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के उनके आदेश की दुनिया भर में आलोचना हुई और विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि ट्रंप प्रशासन को अमेरिका की सिएटल कोर्ट के स्थगन आदेश पर यह प्रतिबंध वापस लेना पड़ा।
यह तथ्य है कि विभिन्न देशों में आतंकी हमलों में शामिल पर्यटक मुस्लिम थे, पर इसका मतलब यह कतई नहीं कि सभी मुस्लिम आतंकवादी हैं। हजारों अमेरिकी सैनिक इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ इराकियों के साथ लड़ रहे हैं। यह प्रतिबंध उस ईरान पर भी लगाया गया था, जिसके साथ ओबामा ने ऐतिहासिक परमाणु समझौता किया था और जिसने सीरिया में आईएस को हराने के लिए रूस से हाथ मिलाया। इराक और सीरिया में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप कैसे ईरानियों पर प्रतिबंध लगा सकते हैं? क्या इससे आईएस को कुचलने की संभावना बढ़ेगी? ट्रंप के पास इसका जवाब नहीं है! इसके विपरीत इससे आईएस को पश्चिम-विरोधी प्रचार और युवा मुस्लिमों की भर्ती में मदद मिलती। दिलचस्प है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, लेबनान, मिस्र और इंडोनेशियों जैसे मुस्लिम देशों को इस प्रतिबंध से अलग रखा गया था। क्या ऐसा इसलिए कि इन देशों में ट्रंप के अपने कारोबार हैं?
कनाडा ही नहीं, जर्मनी और ब्रिटेन में ट्रंप के प्रतिबंध का विरोध हुआ। भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ अभी चुप हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनकी चिंताओं को भारतीय राजनयिक, व्यावसायिक चैनलों और व्यापक भारत-अमेरिकी रिश्तों के जरिये पहुंचाया जाएगा, जिससे एच1बी वीजा के संभावित शुल्क वृद्धि का उन पर कम प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका में ऊंची नौकरी की होड़ में उनके पास अपनी सेवा के उन्नयन और नवोन्मेष के सिवा कोई विकल्प नहीं है। सौभाग्य से अमेरिका अब भी वैसा देश है, जहां लोक सेवक, शिक्षाविद्, मीडिया और व्यावसायिक दिग्गज सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति के फैसले का विरोध कर सकते हैं और अदालत में उन्हें चुनौती दे सकते हैं। विभिन्न कंपनियों के प्रमुखों ने उनके फैसले को सिएटल की संघीय अदालत में चुनौती दी। करीब एक हजार अमेरिकी राजनयिकों ने अमेरिकी विदेश विभाग के सामने ट्रंप के इस फैसले के प्रति असंतोष जताया। क्या कोई ऐसा देश है, जहां इतनी मजबूती से बेधड़क असंतोष जताया जा सकता है? यह अमेरिकी लोकतंत्र की असली ताकत को रेखांकित करता है।
कई टिप्पणीकारों ने ट्रंप की तुलना क्रॉकरी की दुकान में घुसे एक बिगड़ैल बैल से की है। तो यह उग्र बैल अपना उन्मादी आचरण कैसे बंद करेगा? मतदाताओं को यह भरोसा दिलाने के लिए कि वह अमेरिकी हित में काम करेंगे, ट्रंप को अपने कुछ फैसले पर पुनर्विचार करना होगा। अमेरिका को फिर से महान बनाने का सपना धरा ही रह जाएगा, यदि वह घरेलू स्तर पर व्यावसायिक हितों और शिक्षाविदों को धमकाना बंद नहीं करते और चीन के साथ-साथ सहयोगियों को टकराव के जोखिम में डालने का खतरा बंद नहीं करते।