दूसरों की पत्नी धर्मपत्नी होती होगी, मगर मेरी पत्नी तो केवल पत्नी है। आप गलत मत समझना, मैंने बड़े पारंपरिक ढंग से शादी की है, पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ, और यहां तक कि प्रेम विवाह करने की गुस्ताखी तक नहीं की है। सब कुछ वैसे ही किया है, जैसे भले घरों के लड़के आज भी किया करते हैं।
फिर भी मैं कहता हूं, वह मेरी पत्नी, धर्मपत्नी नहीं है। वैसे जब संयोग से किसी दूसरी महिला को भी लोग मेरे साथ देखते हैं, तो मेरी इमेज मोदी जी के सफाई अभियान से पहले ही भगवान की कृपा से इतनी ज्यादा ऊपर से साफ-सुथरी बनी हुई है कि बिना कहे लोग मान लेते हैं कि ये या तो इनकी बहन होंगी या कोई और इनके नजदीकी रिश्ते में होगी, मगर इनकी प्रेमिका तो निश्चित रूप से नहीं हैं। अगर इनका कोई गड़बड़ मामला कहीं होगा भी, तो यह इतने ज्यादा ‘चरित्रवान’ हैं कि उस स्त्री का सार्वजनिक प्रदर्शन करने की हिम्मत नहीं करेंगे।
खैर आप शायद पूछना चाहेंगे कि ऐसा क्यों है कि मेरी पत्नी सिर्फ पत्नी है। मुझे परेशानी इस बात से है कि कोई यह कभी नहीं कहता कि यह इनके धर्मपति हैं। तो मैं पत्नी को धर्मपत्नी क्यों कहूं? हम अगर धर्मपति नहीं हो सकते, तो तुम भी धर्मपत्नी नहीं हो सकतीं। मैंने डिक्शनरियां छान मारीं कि क्या धर्मपति जैसा भी कोई शब्द होता है। अगर होता है, तो मैं अपने को धर्मपति कहना शुरू करूं और उन्हें धर्मपत्नी कहने लगूं। मगर दुर्भाग्यवश आज तक मुझे ऐसा कोई शब्द नहीं मिला। डिक्शनरी में धर्मपुत्र है, धर्मपुत्री है, धर्मपिता है, धर्मभाई है, सहधर्मिणी है, धर्मयुग (साप्ताहिक नहीं) है, मगर धर्मपति नहीं है।
आपको धर्मपति शब्द पर हंसी आ रही होगी, पर धर्मपत्नी शब्द सुनकर कभी आई हंसी? आप यह सुनकर इसलिए नहीं हंसे, क्योंकि यह शब्द आप बचपन से सुन रहे हैं। मगर जरा सोचिए, धर्मपत्नी शब्द का भला क्या मतलब है? क्या किसी पति की अधर्मपत्नी भी होती है? अगर सारी पत्नियां धर्मपत्नियां ही हैं, तो उन्हें केवल पत्नी ही क्यों न कहा और सार्वजनिक तौर पर माना जाए?