देश की अदालत वाहनों पर लगने वाली लालबत्ती के दुरुपयोग को लेकर कुपित है। जबकि मैं लालबत्ती के सदुपयोग का मौका न मिल पाने को लेकर चिंतित हूं। लालबत्ती जब किसी वाहन के मत्थे पर चमकती है, तब बड़ी करामाती हो जाती है।
लालबत्ती जगमगाती है, तो उस वाहन में सवार होने वाले का ऐश्वर्य जगमगाता है। लालबत्ती देखने वालों को डराती है, धमकाती है और रिझाती भी है। लालबत्ती से सरकारी रूतबे का पता चलता है। लालबत्ती देखते ही ट्रैफिक के सारे नियम शिथिल पड़ जाते हैं।
मेरे पास अपने वाहन पर लालबत्ती लगा पाने का अधिकार तो नहीं है, पर इसका सपना जरूर है। हालांकि कहने के लिए मेरे पास लालबत्ती भी है, जिसे मैं एक दिन हर जुम्मे को लगने वाले चोर बाजार से मामूली कीमत पर खरीद लाया था। उसे खरीदते समय मेरे पास तर्क यह था कि चूल्हा होगा, तो देर-सबेर आग भी आ ही जाएगी, और एक बार चूल्हा जला, तो उस पर रोटियां सिंकने का सिलसिला भी चल ही निकलेगा।
लेकिन चोर बाजार से लाई गई वह लालबत्ती फिलहाल घर के एक कोने में दुबकी है और जब-तब मुझे मुंह चिढ़ाती है। इसके बावजूद लालबत्ती लगा पाने का मेरा सपना बरकरार है। इसके लिए मैंने एक सेकेंड हैंड गाड़ी का भी जुगाड़ कर रखा है। बस इंतजार सरकार की दयानतदारी का है। मुझे यकीन है कि एक न एक दिन मेरा मन मयूर मेरे वाहन पर लगी लालबत्ती के रूप में जरूर नाचेगा।
मैं लालबत्ती को लेकर बेहद आशावादी हूं, पर कभी-कभी मेरा प्रगतिशील मन और जनवादियों की संगत का असर उसमें अड़चन पैदा कर देता है। तब मैं गहरे अवसाद में डूब जाता हूं। लालबत्ती का ख्वाब देखते-देखते मेरी आवारा सोच शहर की उस बस्ती में पहुंच जाती है, जिसे लोग आममून रेड लाइट एरिया कहते हैं। वहां की अंधेरी गलियों का रेड लाइट से क्या संबंध है, यह मेरे लिए असमंजस का विषय है।
लालबत्ती कुछ लोगों के लिए उनकी महत्वाकांक्षा का पर्याय है, तो किसी के लिए इसका बेजा इस्तेमाल गहन मनन का मुद्दा है। मेरे लिए लालबत्ती ऐसी पहेली है, जो अंग्रेजी में अनूदित होकर जब रेड लाइट बनती है, तो सारे आवागमन को रोक देती है या दुनिया के सबसे पुराने धंधे के रूप में हमारी संवेदनशीलता को भोथरा बनाकर उसे सहज स्वीकार्य बना देती है। लालबत्ती सबको प्यारा है, तो रेड लाइट इतना अमानवीय क्यों है!