अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं को रोकने के लिए लगातार वीजा संबंधी रुकावटें दिखाई दे रही हैं, जिनका अमेरिका में भारी विरोध भी हो रहा है। विगत 12 मई को ट्रंप प्रशासन ने वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका में रह रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक कठोर ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की, जो आगामी अगस्त से प्रभावी हो जाएगी।
ऐसे में अमेरिका में अध्ययनरत छात्र चिंतित हैं। विगत चार मई को अमेरिका की आउटसोर्सिंग कंपनियों के समूह एनएएम और डेरेक्स टेक्नोलॉजी ने ट्रंप प्रशासन पर उच्च कौशल प्राप्त विदेशी पेशेवरों के लिए जारी होने वाले एच-1 बी वीजा पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। कहा गया है कि एच-1बी वीजा पर लगाई गई बंदिशों के कारण अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान होगा। अमेरिकी पेशेवरों को रखना अधिक खर्चीला साबित होगा। योग्य पेशेवरों की अमेरिका में कमी भी है।
अमेरिकी कंपनियों की शोध इकाइयों में काम कर रहे विदेशी वैज्ञानिकों को शीघ्रतापूर्वक बदलना असंभव है। मुकदमा दर्ज कराते हुए यह भी कहा गया है कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन विभाग को नियमों में बदलाव का अधिकार नहीं है। यह अमेरिकी कानून का उल्लंघन है।
दूसरी ओर, इन दिनों भारत सरकार अमेरिका में भारत के प्रभावी प्रवासी भारतीय, भारत के शुभचिंतक अमेरिकी सांसद,नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेस कंपनीज (नासकॉम) और सिलिकॉन वैली में कार्यरत फेसबुक, गूगल और माइक्रोसाफ्ट जैसी कंपनियों द्वारा विगत 24 अप्रैल को ट्रंप सरकार द्वारा एच-1 बी वीजाधारकों के जीवन साथियों के लिए वर्क परमिट के लिए दिए जाने वाले एच-4 वीजा को खत्म करने की योजना का भारी विरोध किया जा रहा है। 2015 में बराक ओबामा के कार्यकाल में एच-1बी वीजा रखने वाले व्यक्ति के जीवन साथी को वर्क परमिट देने का फैसला हुआ थाा। इससे सर्वाधिक फायदा भारतीय पेशेवरों को हुआ।
अप्रैल, 2018 से एच-1बी वीजा नियमों को कड़ा करने की कवायद तेज हुई है। वीजा संबंधी नए नियमों से अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों के थर्ड-पार्टी सप्लायर बेस को तगड़ा झटका लगा है। ये नियम भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए भी अत्यधिक कष्टदायी हैं। वीजा नियमों में सख्ती के कारण 2017 में भी अमेरिका में भारतीय कंपनियों के लिए 8,468 नए एच-1 बी वीजा प्राप्त हुए। यह संख्या 2015 की तुलना में 43 फीसदी कम है।
अमेरिका सहित कुछ विकसित देशों में भारतीय पेशेवरों के कदमों को रोकना जरूरी है, तो दुनिया में तेजी से बढ़ती जा रही भारतीय पेशेवरों की संभावनाओं को साकार भी करना होगा। जापान ने आगामी दो साल में भारत से दो लाख आईटी पेशेवरों की पूर्ति हेतु कार्ययोजना बनाई है। विश्व बैंक ने आगामी पांच साल में भारत में नई सिलिकॉन वैली बनने की संभावना बताई है, जबकि वैश्विक संगठन मैकिंसे की नई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, बंगलूरू 2020 तक सिलिकॉन वैली को पछाड़ दुनिया का सबसे बड़ा आईटी क्लस्टर होगा।
दुनिया में आईटी शक्ति के रूप में आगे बढऩे के लिए जहां देश की नई पीढ़ी को कौशल प्रशिक्षण और नवाचार से सुसज्जित कर नए आर्थिक मौकों का लाभ लेना होगा, वहीं जिन देशों में भारतीय प्रतिभाओं के लिए वीजा संबंधी प्रतिबंध लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए भारत सरकार, विदेशों में कार्यरत प्रवासी भारतीयों, भारत के हित चिंतक विदेशी सांसदों और नासकॉम द्वारा सार्थक प्रयास किए जाने होंगे।