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जो बिकता है वही महान

Mon, 02 Feb 2015 07:33 PM IST
योगेंद्र शर्मा
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जो अच्छा है, वही है बिकता। जो बिकता है, वही है अच्छा। जो जितना बड़ा बेचू, वह उतना बड़ा महान। समझने वाले समझ गए हैं, ना समझे नादान। बूझो तो धरती के महान राष्ट्र कैसे बने महान? अपने हथियार उद्योग के बल पर। वे चोर से कहते कि बेट्टा मन लगाकर चोरी करियो, और सिपाही से कहते कि बरखुर्दार, तू जागते रहियो। हथियार दे पहले अशांति की फसल उगाते, फिर उसे उजड़वा कर शांति स्थापना करवाते। विश्व शांति के अग्रदूतों को मेरा बारंबार प्रणाम।
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जवानी में हम कहते थे, तकदीर हो, तो अमिताभ जैसी, वर्ना न हो। बुढ़ापे में कहते हैं कि मुकद्दर हो, तो शाहरुख, सलमान जैसी, वर्ना न हो। बूझो तो ये सब कैसे बने महान? तो भैये, पहले इन्होंने बेचा अभिनय, फिर बेचा बाजार का माल। विज्ञापन के चेतक पर होकर सवार, छह पैसे का पानी बेचो पंद्रह रुपये यार।

पता है तुम्हें, विराट की बल्लेबाजी का राज, एक गोरेपन की क्रीम, और धोनी की सफलता का राज-एक अनोखा कोला। क्रिकेट का भगवान जिसे पी बोले, ये दिल मांगे मोर। शाहरुख के अभिनय के पीछे है एक शेविंग क्रीम, और सलमान की सफलता का राज-एक वॉशिंग पाउडर।
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बिग बी रोज बुलाते हम को सुबह-सुबह गुजरात, बिटिया के लहंगे की आकर ले जाओ सौगात। लहंगा बीस हजार का, और आने-जाने का खर्चा। कम से कम चालीस हजार। इतना पैसा हो अंटी में, तो आऊं गुजरात। बड़े भइया, कैसे आऊं गुजरात। टेंशन हुई गई रे बड़े भइया, कर चंपी सिर की तेल डाल कर, ठंडा-ठंडा कूल-कूल। उधर हमारी हेमा जी हैं फर्माती, ऑल क्लीन से चश्मा साफ कर नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा।

अब चिंता है देश हमारा कैसे बने महान। तो प्रेम से बोलो-जय मोदी, जय ओबामा, जय-जय स्वच्छता अभियान। जय-जय नारी शक्ति, जय बेटी बचाओ अभियान। बाहर के कचरे को साफ करना है आसान, परंतु मन के कचरे का भी तो रखो जरा ध्यान। हे चतुर सुजान, तुम भी बनो महान, मुझे भी बनने दो महान, क्योंकि मैं हूं बहुत परेशान कि कैसे बनूं महान।
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