चुनाव परिणाम और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में गुजरात की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले सूरत की आगजनी की भयावह घटना चर्चा के केंद्र में नहीं आ सकी। हालांकि इस घटना ने देश को झकझोर दिया। भारत के होनहार 15 से 22 वर्ष की उम्र के 21 बच्चों का आग में झुलसकर या आग से बचने का कोई रास्ता न देखकर कूदकर जान गंवा देना ऐसी त्रासदी है, जो नहीं होनी चाहिए थी। सूरत जैसे शहर के मुख्य इलाके में स्थित कॉम्प्लेक्स में इस तरह की आग लगना और फिर बिल्कुल असहाय की अवस्था अकल्पनीय है। इस कॉम्प्लेक्स में कोचिंग सेंटर, जिम, फैशन डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट, नर्सिंग होम समेत कई शॉपिंग सेंटर हैं, लेकिन आग लगने के बाद बचाव का कोई उपाय नहीं था।
कॉम्प्लेक्स में दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिंग क्लास चलती थी। कहा जा रहा है कि आग ट्रांसफॉर्मर में शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई। बच्चों ने जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से कूदना शुरू कर दिया। नीचे जमा स्थानीय लोगों ने कूद रहे बच्चों को कैच करना शुरू किया, ताकि बच्चों के सिर पर सीधी चोट न आए। इस तरह लोगों ने 11 बच्चों को बचा लिया और कूदने वाले एक बच्चे को नहीं बचाया जा सका। जो 20 बच्चे नहीं कूद पाए, उनकी झुलसकर जान चली गई। कुछ की दम घुटने से मौत हो गई।