साधो, विरोधी सांसदों की मांग पर गिरिराज सिंह ने भले ही अपनी टिप्पणी पर खेद जताया है, पर इसका मतलब यह नहीं कि अब वह ऐसी टिप्पणियां नहीं कर पाएंगे। गिरिराज सिंह के कामकाज के बारे में लोग भले न जानें, पर उनके बयानों से परिचित हैं।
उनकी देशभक्ति का आलम यह है कि वह किसी भी नास्तिक को पाकिस्तान भिजवा देने की हिम्मत रखते हैं, और लापता हुआ व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो, उनकी तुलना गुम हुए मलयेशियाई विमान से कर देने में उन्हें तनिक हिचक नहीं होती। जिस देश का प्रधानमंत्री छप्पन इंच के सीने के लिए जाने जाते हों, उनके मंत्री को ऐसा ही बयानवीर होना चाहिए।
गिरिराज सिंह जब बोलते हैं, तब बात दूर तलक जाती है। जो दूर तलक गुंजायमान न हो, वह गिरिराज की बात नहीं। गिरिराज जो कुछ कहते हैं, वह तलवार की धार जैसा होता है। उनकी बात तीर की मानिंद चुभती है और टंकार की तरह देर तक गूंजती-बजती है। वह जब बोलते हैं, तब आसमान थरथराता है। पृथ्वी कंपायमान होती है। उनका कहा हुआ जंगल में शेर की दहाड़ है।
वह यों ही हवा में नहीं बोलते। उनके ऑफ द रिकॉर्ड कहे को भी हवा में उड़ा देना संभव नहीं। उनकी खूबी यह है कि वह अपनी बातों से हवा बांधते हैं। वह जो कुछ कहते हैं, वह देर तक हवा में तैरता रहता है। वह कहते ही इसलिए हैं कि बातें समुद्र और आसमान लांघ लें। उनके बयान हमेशा मकसद से भरे होते हैं। वह बातों के अचूक निशानेबाज हैं।
वह हवा में तीर जरूर चलाते हैं, लेकिन उनका निशाना खाली नहीं जाता। गिरिराज को लफ्फाजी नहीं आती। वह बोलते हैं, तो फूल झड़ते हैं! कांग्रेसी अंधे हैं, जो उन फूलों को देख नहीं पाते। बल्कि भाजपा को भी गिरिराज के कहे का महत्व पता नहीं, इसलिए उनकी टिप्पणियों से पल्ला झाड़ लेती है।
हकीकत यह है कि गिरिराज का कहा पत्थर की लकीर की भांति अमिट होता है, जो भाजपाइयों के मिटाए भी नहीं मिटता। हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में गिरिराज पैदा।