उस समय कूटनीतिक प्रयास सफल हुए थे, और रूस ने कुछ दिनों और घंटों के लिए युद्धविराम की घोषणा की थी, ताकि लोग बाहर निकल सकें। हर किसी को यह हमेशा याद रहेगा कि कैसे विभिन्न देश, यहां तक कि जिनके संबंध अच्छे नहीं थे, उन्होंने भी अपने तनाव को भुलाकर एक-दूसरे की मदद की। पाकिस्तान और भारत, दोनों ने एक-दूसरे की, विशेष रूप से छात्रों की मदद की थी।
यूक्रेन और सूडान विश्व की बदलती वास्तविकताओं के केवल दो उदाहरण हैं। अचानक हुए संघर्ष और गृहयुद्ध सभी को हैरान कर रहे हैं और अब यह नया कायदा प्रतीत होता है। इसलिए क्षेत्रीय देशों को एकजुट होकर भविष्य के लिए आकस्मिक योजनाएं बनानी होंगी।
भारत और कुछ अन्य मुल्कों द्वारा पाकिस्तान में होने वाले शिखर सम्मेलन को वीटो करने के बाद सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, दक्षेस) कमोबेश मर चुका है। सार्क सर्वसम्मति से काम करता है और अगर एक देश विरोध करता है एवं उससे दूर रहता है, तो पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। यह कम से कम आपातकालीन स्थितियों के दौरान क्षेत्रीय देशों के किसी अन्य मंच पर एकजुट होने और इस बात पर सहमत होने का समय है कि युद्ध क्षेत्रों से अपने नागरिकों को निकालने के दौरान वे एक-दूसरे की देखभाल करेंगे। इससे हर देश लाभान्वित होगा।
लेकिन इस बीच पाकिस्तान की एक खबर ने सूडान की खबरों को पीछे धकेल दिया है, जिसका मुल्क की न्यायिक एवं राजनीतिक प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। भारतीय टीवी शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी से पाकिस्तान के भी बहुत से लोग परिचित हैं। लेकिन अभी पाकिस्तान की एक सास प्रसिद्ध हो गई है और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए गए एक लीक फोन कॉल के चलते लोगों के बीच चर्चित हो गई है।
पिछले एक साल से पाकिस्तान में कोई भी ऐसा नहीं है, जिसका फोन टैप न हुआ हो। हालांकि दुनिया भर में फोन कॉल सरकार और खुफिया एजेंसियों द्वारा टैप किए जाते हैं, लेकिन यह दुर्लभ है कि बाद में इन ऑडियो और वीडियो को ब्लैकमेल और शर्मिंदा करने के लिए सार्वजनिक किया जाता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पीटीआई प्रमुख एवं पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, मरियम नवाज शरीफ, जज, राजनेता और नौकरशाह के भी फोन टैप किए गए हैं। इमरान खान का एक महिला राजनेता के साथ बात करते हुए ऑडियो वास्तव में बहुत ही शर्मनाक है, क्योंकि यह बेहद निजी बातचीत है, लेकिन इसका उनके समर्थकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
पाकिस्तान में सिर्फ सशस्त्र बल ही ऐसा संस्थान है, जो सुरक्षित बचा हुआ है और जिसके फोन टैप करके सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए यहां पूछा जा रहा है कि क्या सशस्त्र बल और उसकी खुफिया एजेंसियां इन ऑडियो और वीडियो संदेशों को टैप कर सार्वजनिक कर रही हैं? यही वजह है कि मौजूदा सरकार के कैबिनेट मंत्रियों ने भी निंदा करते हुए अपनी चिंता जताई है और इन रिकॉर्डिंग के पीछे कौन है-इसकी जांच की मांग की है। आंतरिक मामलों के मंत्री राणा सनाउल्लाह ने हाल ही में पाकिस्तान के मौजूदा प्रधान न्यायाधीश की सास से संबंधित ऑडियो लीक के बारे में कहा है कि ऑडियो देश पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित है और कुछ केंद्रीय मंत्रियों ने यह भी मांग की कि प्रधान न्यायाधीश इस्तीफा दे दें।
इस बीच, एक ही दिन प्रांतीय और आम चुनाव कराने के संबंध में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ द्वारा बुधवार को होनी थी। पर आश्चर्यजनक रूप से सुप्रीम कोर्ट ने इसे सूची से निकाल दिया, क्योंकि खबरों में बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश की तबीयत ठीक नहीं है और वह बीमार हैं। आमतौर पर मुख्य न्यायाधीश के अनुपलब्ध होने पर उनकी जगह कोई और ले लेता है, लेकिन उन्होंने किसी और को नामित नहीं किया। पत्रकार सिरिल अल्मेडा कहते हैं, 'रिकॉर्डिंग (चाहे असली हो या नकली), वीडियो की कोई परवाह नहीं करता, यहां तक कि जिनकी रिकॉर्डिंग होती है, वे भी परवाह नहीं करते।'
पीपीपी के एक वरिष्ठ सदस्य सीनेटर फरहतुल्ला बाबर ने कहा कि पूछे जाने वाले प्रश्नों के क्रम पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 'सास का ऑडियो टैप असली है या नकली? यदि फर्जी है, तो बात खत्म। यदि वास्तविक है, तो यह निर्णायक घड़ी है। ज्यादा परेशान करने वाली बात क्या है? निजी बातचीत टैप करना या टैप की सामग्री या न्याय के तराजू को झुकाने की इसकी क्षमता?' इस हफ्ते यहां ठीक यही हुआ है।
'ये कम्बख्त मार्शल लॉ भी नहीं लगता'- पाकिस्तान के मौजूदा प्रधान न्यायाधीश अता उमर बांदियाल की सास महजबीं नूर पीटीआई की समर्थक राफिया तारीक से कहती हैं। राफिया तारीक सुप्रीम कोर्ट में इमरान खान का केस लड़ने वाले वकील ख्वाजा तारीक रहीम की पत्नी हैं। महजबीं सैन्य प्रमुख असीम मुनीर के बारे में बात कर रही हैं, जिन्होंने घोषणा कर दी है कि सेना इस मामले में तटस्थ रहेगी और राजनीति में दखल नहीं देगी। दो पत्नियों का फोन पर बात करना और ताजा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करना कोई बड़ी खबर नहीं है। लेकिन ये दोनों महिलाएं साधारण नहीं हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ बेहद महत्वपूर्ण लोगों की रिश्तेदार हैं। इसकी पृष्ठभूमि में सरकार, संसद और सुप्रीम कोर्ट के बीच चल रही खींचतान है, जहां हर संस्था यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि संविधान के तहत उसके पास कुछ अधिकार हैं।
लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन चेतावनी देते हैं, 'मुल्क की राजनीतिक शक्ति और कानून लागू करने वाली संस्थाओं में क्षरण के साथ हम पूर्ण अराजकता की ओर बढ़ रहे हैं। हम भले अभी 'विफल राज्य' की श्रेणी में नहीं आते, लेकिन राज्य के ढहते अधिकार और शासन प्रदान करने की अक्षमता के साथ तेजी से इस ओर बढ़ रहे हैं। ऑडियो लीक का बढ़ता चलन कमजोर मुल्क का लक्षण है, जो लोगों के बुनियादी मानवीय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने में असमर्थ है। खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की बढ़ती ताकत किसी अपशकुन से कम नहीं है।'