बीते हफ्ते मैच फिक्सिंग मामले में बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद की संलिप्तता एवं छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला का मुद्दा छाया रहा। सुखद है कि श्रीनिवासन के इस्तीफे की बात कहकर ऊर्जा मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बेबाकी का परिचय दिया है। इस मसले पर चुप रहने वालों की निंदा ही की जा सकती है।
सबसे दयनीय छवि महेंद्र सिंह धोनी की है, जो न सिर्फ संदेह के घेरे में आई टीम चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) के कप्तान हैं, बल्कि श्रीनिवासन की कंपनी इंडिया सीमेंट के वायस प्रेसिडेंट भी हैं। उन्होंने जैसा व्यवहार किया, वह निंदनीय है। मैं उनके भविष्य की निराशाजनक तस्वीर देख रहा हूं, क्योंकि लोगों की याददाश्त लंबे समय तक रहती है।
धोनी ने सीएसके एवं इंडिया सीमेंट की सेवा करके और सुनील गावस्कर एवं रवि शास्त्री जैसे हमारे क्रिकेट जगत के दिग्गजों ने कमेंटेटर के रूप में क्या कीमत चुकाई है, वह स्पष्ट है। लेकिन तीस सदस्यीय बीसीसीआई में ज्यादा दिनों तक चुप्पी का षड्यंत्र कायम नहीं रह पाएगा।
तीन सदस्यीय जांच समिति छलावा से ज्यादा कुछ नहीं है। अगर पुलिस को काम करने दिया जाए, तो सेकंडों में ही पूरा ढांचा ढह जाएगा। हैरानी नहीं होनी चाहिए कि मयप्पन पर लगाए आरोपों से विंदू दारा सिंह मुकर गया है। क्या बोर्ड के सदस्यों ने उन्हें ऑफर दिया है? जांच में फिक्सिंग के तार गहरे तक अंडरवर्ल्ड से जुड़े पाए गए हैं।
हो सकता है कि अकेले डी कंपनी इसमें शामिल न हो, पर इसी तरह के कई और संगठन इसमें संलिप्त हैं। अगर इस मामले की उचित जांच करवानी है, तो इसे प्रधान न्यायाधीश के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि यह हजारों करोड़ रुपये का मामला है और इसके तार दुबई तक से जुड़े हैं। यह काले धन को वैध करने का भी मामला हो सकता है और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इस मामले में जेलों में बंद गवाहों को चुप कराया जा सकता है, इसलिए चौबीसों घंटे उनके संरक्षण की जरूरत है। आखिर किसी ने तो विंदू दारा सिंह को बयान बदलने के लिए मजबूर किया ही। तमिलनाडु का होटल मालिक टीटू अग्रवाल भी अब तक लापता है। उसकी पत्नी वंदना ने संकेत दिया है कि चेन्नई सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया है, पर क्या यह संभव हो सकता है?
वह कहीं छिपा हो सकता है, पर उसका जीवन खतरे में है, क्योंकि उसने दुबई स्थित ऑपरेटरों के साथ व्यवसाय किया है। कई लोग हैं, जो उसे चुप कराना चाहेंगे। जाहिर है, दिनोंदिन स्थिति मुश्किल होती जा रही है। उधर श्रीनिवासन उन लोगों को अपनी तरफ मिलाते जा रहे हैं, जिन्होंने उनसे लाभ उठाया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धमाका कर दिया है, जिसका संदेश स्पष्ट है। उसके बाद अरुण जेटली एवं राजीव शुक्ला ने भी बीसीसीआई अध्यक्ष पर इस्तीफे का दबाव बनाया। यह एक स्वागतयोग्य कदम है। बीसीसीआई अध्यक्ष के खिलाफ बगावत के सुर मुखर होने लगे हैं। जिन लोगों ने इस मामले में चुप्पी साधे रखी, उन्हें जाना पड़ सकता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे क्रिकेट जगत के दिग्गज हैं।
उधर छत्तीसगढ़ की त्रासदी स्तब्ध करने वाली है। हर रोज किसी नए चश्मदीद का वर्णन हमारे सामने आ जाता है। राज्य के घर-घर में जो बातें हो रही हैं, उसके मुकाबले तो यह कुछ भी नहीं है। निश्चित रूप से भाजपा एवं मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए गंभीर समस्या पैदा हो गई है। हमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी की रिपोर्ट की प्रतीक्षा करनी चाहिए, लेकिन यह एक राजनीतिक घटना थी, जिसमें पीड़ितों को पहचानने के बाद बर्बरता से हत्या की गई।
नक्सलियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है। एक राष्ट्र के रूप में हम इस तरह ब्लैकमेल नहीं हो सकते।
इस तरह की त्रासदी फौरी समाधान की मांग करती है। तात्कालिक समाधान के लिए उठाए गए कदमों के बाद जब हमारे सामने कुछ सकारात्मक संकेत होंगे, तो हम स्वयं को दीर्घकालीन रणनीति के लिए तैयार कर पाएंगे। सफलता हासिल करने के लिए हमें कुछ जरूरी कदम भी उठाने होंगे।
सेना की तैनाती समाधान नहीं है। यह उन्हीं राज्यों में कारगर है, जहां विदेशी सीमा से सटे होने के कारण 'विशेष तरह की स्थितियां' हैं। यदि हम अतीत पर नजर डालें और संभावित समाधन पर गौर करें, तो पाएंगे कि एक खास समय में हर राज्य की सफलता का खास फार्मूला रहा है, पर एक चीज जो सबमें समान है, वह है, पुलिस का प्रभावी उपयोग। इसका सबसे बेहतर उदाहरण आंध्र प्रदेश है। केंद्रीय बल तो आपातकालीन समाधान में मददगार होते हैं।
सफलता के लिए इच्छाशक्ति बेहद जरूरी है। और यह गुण छत्तीसगढ़ के कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल में मौजूद था, जिनकी पुत्र एवं सहयोगियों समेत हत्या कर दी गई। माओवादियों ने एक भयंकर भूल की है। छत्तीसगढ़ की फिजाओं में बदलाव की हवा बह रही है और इस क्रूरतापूर्ण हादसे से हर तबके के लोगों में बदलाव की भावना बढ़ेगी। भाजपा ने कहा है कि इसे लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना सही है, लेकिन क्या आप राज्य की जनता को चुप करा सकते हैं?
इस हादसे में 84 वर्षीय विद्याचरण शुक्ल भी घायल हुए हैं, उन्हें तीन गोलियां लगी हैं। दो महीने पहले ही उनसे मेरी लंबी बातचीत हुई थी, उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता देखकर मैं चकित था। हम उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं और उनकी प्रतिबद्धता एवं उनके युवकोचित उत्साह को नमन करते हैं।