फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब जिंदगी ऑड हो जाए

Mon, 11 Jan 2016 07:09 PM IST
अभिषेक मेहरोत्रा
विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली सरकार का ऑड-ईवन सिस्टम हालांकि अब अपने आखिरी दौर में है, लेकिन हमारे मोहल्ले में इसके बहुत दिलचस्प नतीजे देखने में आए हैं। उस दिन कूड़ा उठाने वाला जब काफी देर से आया, तो हमने उसे हड़काते हुए कहा, इतनी देर से कहां गायब थे? उसने तुरंत जवाब दिया, साहब, हमरी कार तो ऑड नंबर की है, इसलिए आज पड़ोसी मोहल्ले का कूड़ा उठाने वाले अपने साथी के साथ कार पूलिंग करके आया हूं, सो पहले वह अपने मोहल्ले गया और फिर वहां की साफ-सफाई के बाद हमें यहां छोड़ा है। मोहल्ले में साफ-सफाई अगर समय पर चाहिए, तो हमें एक ईवन नंबर की गाड़ी दिलवा दीजिए।
विज्ञापन


अभी उससे निपट भी नहीं पाए थे कि पता चला, घर की कामवाली बाई का फोन आया है कि साहब की गाड़ी तो ईवन नंबर की है, आज ईवन नंबर वाली गाड़ी का दिन है, इसलिए साहब को घर भेज दीजिए, हमें पिक कर लेंगे। ड्रॉप की चिंता मत कीजिए, उसके लिए भाटिया जी तैयार हैं। वह दुकान से लंच के लिए घर आएंगे, तो हमें भी हमारे घर ड्रॉप कर देंगे।

लो जी, जैसे-तैसे कामवाली बाई को घर पर छोड़ा, क्योंकि वह नहीं आती, तो घरवाली अपसेट हो जाती। सबको सेट करके मैं फटाफट ऑफिस के लिए निकल ही रहा था कि कॉलोनी के गेट पर ठकुराइन भाभी मिल गईं। उन्होंने गाड़ी की नंबर प्लेट देखकर कहा, भाई साहब, आप तो ईवन नंबर वाले हैं, जरा मुझे रास्ते में पड़ने वाले ब्यूटी पार्लर तक ड्रॉप कर दीजिए। अब आप ही बताइए, सुबह-सुबह पड़ोस की भाभी जी को कौन मना करता? सो मैं उनको भी उनके ठिकाने पर पहुंचा आया।
विज्ञापन


और इस चक्कर में ऑफिस लेट पहुंचा, तो मैनेजर साहब ने हड़काते हुए कहा, ईवन नंबर की गाड़ी है, फिर ईवन दिन ही लेट आ रहे हो? अपने साथी को तो देखो, वह ऑड नंबर की गाड़ी के मालिक हैं, फिर भी किसी ईवन नंबर वाले की मदद से ऑफिस सही टाइम पर आ गए है। मैंने मन ही मन कहा, यह मुआ ईवन नंबर...इसके चक्कर में जिंदगी में ऑड-ऑड सा लगने लगा है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें