भले ही दिन की शुरुआत खराब हो, (जैसे कोई कठिन मीटिंग, बुरी खबर या किसी का रूखा व्यवहार) पर हमारे पास दिन का अंत बेहतर बनाने की क्षमता होती है। अक्सर हम किसी एक घटना को इतना बड़ा बना लेते हैं कि पूरा दिन उसी के असर में चला जाता है, जबकि यदि हम थोड़ा रुककर सोचें और स्थिति को अलग नजरिये से देखें, तो उसका प्रभाव कम हो सकता है।
संचार मामलों के प्रोफेसर माइकल ली का भी मानना है कि जब कोई नकारात्मक अनुभव हो, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय खुद से पूछना चाहिए कि क्या यह वाकई इतनी गंभीर बात है। जब हम इस तरह से सोचते हैं, तो तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और बात उतनी बड़ी नहीं लगती। डॉ. एल्बर्स कहती हैं कि दिन को बेहतर बनाने का एक और सरल तरीका है-अपने अनुभवों में थोड़ा बदलाव लाना। इसे वह ‘संवेदी बदलाव’ कहती हैं। वह कहती हैं कि गर्म पानी से नहाएं, कपड़े बदलें या कोई खुशबूदार मोमबत्ती जलाएं। यह आपका ध्यान भटकाकर आपको तरोताजा महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। या फिर थोड़ा चलें-फिरें, ऐसा करने से आपके दिमाग में मूड को बेहतर बनाने वाले रसायन निकलते हैं, चिंता कम होती है और बार-बार एक ही बात सोचने की आदत से छुटकारा मिल सकता है।
किसी मुश्किल समय के लिए एक ‘भावनात्मक प्राथमिक उपचार किट’ बनाएं। जैसे अपनी पसंदीदा गानों की एक सूची बनाना, जिसे सुनते ही मूड बेहतर हो जाता हो। शुभ संदेशों और अच्छी यादों का संग्रह तैयार करे। ऐसे छोटे-छोटे उपाय मुश्किल समय में बहुत काम आते हैं। कभी-कभी साधारण-सी लगने वाली चीजें भी बहुत असर डालती हैं। जैसे कृतज्ञता का अभ्यास, जिसमें आप अपने आसपास की चीजों के लिए आभार महसूस करते हैं। यह आपके ध्यान को नकारात्मकता से हटाकर सकारात्मकता की ओर ले जाता है। इस तरह, चाहे दिन की शुरुआत कितनी भी खराब क्यों न हो, थोड़ी समझदारी, नजरिये में बदलाव और छोटे-छोटे सकारात्मक कदम उसे बेहतर बना सकते हैं।