एक मासूम, गरीब, आठ साल की बच्ची को कठुआ शहर में कुछ दरिंदों ने एक मंदिर के परिसर में कैद कर नींद की गोलियां खिलाकर कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया। फिर दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया और पत्थरों से चेहरा बिगाड़ कर उसकी लाश जंगलों में फेंक दी, जैसे कूड़ा हो। पिछले सप्ताह जब नन्ही बच्ची की वे दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो जिन लोगों में थोड़ी-सी भी इंसानियत थी, उनको इतनी तकलीफ हुई कि मशहूर अभिनेताओं और खिलाड़ियों से लेकर आम आदमी तक सबने हर तरह से अपना दर्द व्यक्त करने की कोशिश की। फरहान अख्तर ने ट्विटर पर हम सबकी भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया, कल्पना करो कि आठ साल की बच्ची के मन में कितना आतंक रहा होगा, जब उसको ड्रग देकर कई दिनों तक बंधक बनाकर उसका सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसके बाद उसकी हत्या। कल्पना करने के बाद अगर आपको उसका आतंक महसूस नहीं हुआ हो, तो आप इंसान नहीं हैं।
मैंने जब उन तस्वीरों को देखा, तो मुझे इतनी तकलीफ हुई कि बार-बार उसकी वे दो तस्वीरें आंखों के सामने आती रहती हैं। एक जिसमें वह जिंदा है और उसके चेहरे पर मासूम खुशी की मुस्कराहट है। दूसरी जो उसके मरने के बाद ली गई है, जिसमें खून से लथपथ वही चेहरा ऐसा बिगाड़ दिया गया है कि उसे पहचानना मुश्किल है। मैंने इन तस्वीरों को ट्विटर पर पटना एयरपोर्ट पर उस समय देखा, जब मेरे आसपास उसकी उम्र की तीन-चार बच्चियां बैठी थीं। वे बच्चियां इतनी छोटी थीं और उनका शरीर इतना दुर्बल था कि मेरे लिए यकीन करना मुश्किल था कि कोई राक्षस भी उनके साथ बलात्कार करने के बारे में सोचेगा। पर हमारे समाज में ऐसे राक्षस हैं, जिन्होंने उसके साथ कई बार बलात्कार किया। इनमें से एक को मेरठ से बुलाया गया था, ताकि वह भी अपनी हवस पूरी कर सके। ये बातें काल्पनिक नहीं हैं, बल्कि एफआईआर में दर्ज हैं। उसकी कहानी पढ़-सुनकर हजारों लोगों के दिल दर्द से भर गए हैं।
लेकिन एक वर्ग है, जिसको उस बच्ची के साथ हुए बलात्कार और फिर उसकी हत्या से थोड़ी भी तकलीफ नहीं हुई है। यह वर्ग हिंदुत्व के उन पहरेदारों का है, जो खुद को अक्सर तिरंगे से जोड़ते हैं। जम्मू के वे वकील इसी वर्ग से आते हैं, जिन्होंने उन दरिंदों की गिरफ्तारी रोकने की कोशिश की। भाजपा के विधायक ने टीवी पर कहा कि पहले उनको गिरफ्तार किया जाए, जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं। सोशल मीडिया पर हिंदुत्व के कई योद्धा तो इतने कायर हैं कि अपना असली नाम छिपाकर मुझ जैसों को गालियां देते हैं। गालियां इसलिए कि उनका मानना है कि उस बच्ची की कहानी मेरे जैसे ‘सेक्यूलर’ पत्रकार सिर्फ इसलिए उछाल रहे हैं, क्योंकि वह मुस्लिम घर की बेटी थी। इन लोगों ने बार-बार कहा है कि असम और बंगाल में कई हिंदू बच्चियों के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ है, जैसा कठुआ में बच्ची के साथ हुआ, पर इनके बारे में दुनिया नहीं जानती, क्योंकि मेरे जैसे लोग हिंदुओं का दर्द नहीं समझते। इन हिंदुत्ववादियों को मैं सिर्फ यही कहना चाहती हूं कि आप और आपके विचार इतने गिरे हुए हैं कि इस देश का झंडा ऊंचा करने के बदले आप उसका अपमान कर रहे हैं। कैसे लोग हैं आप, जो उस बच्ची का दर्द सिर्फ इसलिए महसूस नहीं कर सकते कि वह मुस्लिम घर में पैदा हुई थी? आप खुद को इंसान कहलाने के भी हकदार नहीं हैं।