उत्तर प्रदेश में दो-तीन दिन के अंदर ही अलग-अलग तरीकों से चार युवतियों, जिनमें से तीन दलित थीं, की मौतें हुई हैं। मौत हुई है या हत्या? लगता तो यह है कि सरकार की नीतियों, प्रशासन की संवेदनहीनता और अपराधियों ने इन चार मासूमों की हत्या ही की है।
बीस फरवरी को उन्नाव जिले के थाना बार-सगवर क्षेत्र में पड़ने वाले गांव की मोनी की हत्या उसकी झोपड़ी से थोड़ी दूरी पर चार बजे शाम को हुई, जब वह साइकिल पर सब्जी खरीदने बाजार जा रही थी। उसके मुंह पर टेप लगाकर, पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जला दिया गया। जिस अरहर के खेत से उसका रास्ता जाता है, उसके पौधे कुचले हुए थे, जो उस लड़की के विरोध की गवाही दे रहे थे। मुंह पर टेप लगाकर जिंदा जला देने की घटना किसी एक अपराधी द्वारा संभव नहीं लगती। परिजनों को दूसरे दिन थाने से बेटी के शव के अवशेष मिले, पर पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आज तक नहीं मिली है। गरीब बेसहारा परिवारों के साथ अक्सर इसी तरह का संवेदनहीन व्यवहार किया जाता है। पुलिस ने तो घोषणा कर दी कि मोनी की मौत प्रेम-प्रसंग का हिस्सा है। उसने राजेश गुप्ता नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने कहा है कि उसे मोनी का दूसरे लड़कों से बात करना अच्छा नहीं लगता था। तो क्या वह यों ही, बिना योजना के टेप और पेट्रोल का पीपा लिए घूम रहा था?
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीएड की पढ़ाई करने वाली निधि यादव बीते 20 फरवरी को डीएलडब्ल्यू कॉलोनी स्थित अपने घर से स्कूटी पर एटीएम जाने के लिए निकली। रास्ते में दो सांड़ लड़ रहे थे। निधि ने अपनी स्कूटी सड़क किनारे खड़ी कर ली। अचानक एक सांड़ ने उस पर हमला कर दिया और वह बुरी तरह से घायल हो गई। 24 फरवरी को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। नई सरकार के पशु संबंधी नियमों का नतीजा है कि सैकड़ों सांड़ छुट्टे घूम रहे हैं और इनमें से एक ने निधि की जान ले ली।
कुछ लड़कों द्वारा लगातार छेड़छाड़ से तंग आकर इटावा की आरती ने कॉलेज जाना ही बंद कर दिया था। 23 फरवरी की शाम को जब वह बाजार गई, तो फिर लड़कों ने छेड़ा। उसने अपने परिजनों को बताया और उसके पिता सुखदेव जाटव ने एक लड़के से आपत्ति जताई। लड़के ने धमकी दी, तो सुखदेव ने थाने में शिकायत की, जिस पर किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया गया। 24 फरवरी की रात को आरती अपनी छोटी बहन के साथ घर पर अकेली थी। दो लड़के उसके घर में घुस गए। उसकी बहन को तमंचा दिखाकर चुप करा दिया और अंदर के कमरे में ले जाकर आरती की गला दबाकर हत्या कर दी गई। उसके शव को खूंटे से लटका दिया गया, ताकि हत्या आत्महत्या लगे। इस मामले में पुलिस ने एक लड़के को गिरफ्तार किया है।
24 फरवरी की शाम लखीमपुर के निघासन तहसील में दलित विधवा जगरानी देवी की 12 साल की बेटी ज्योति ने फांसी लगाकर जान दे दी। उसकी मां मजदूरी करके परिवार चलाती थी, लेकिन एक हफ्ते से उसे कोई काम नहीं मिला था। उसे विधवा पेंशन भी नहीं मिलती थी। दो दिन की भूखी ज्योति पड़ोस से दो रोटी मांगकर घर लौटी, जिसमें से एक रोटी उसकी बहन ने ले ली। भूखी रह गई ज्योति ने अपनी जान ले ली। ज्योति को भूख ने लील दिया। तीन दिन में हुई ये चार मौतें शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता ही दर्शाती हैं।
दलित महिलाओं पर यह कहर थम नहीं रहा है। तीन दिन पहले बलिया में एक दलित महिला रेशमी देवी को दबंग सूदखोरों ने जिंदा जला दिया। वह कथित तौर पर बीस हजार का कर्ज लौटा नहीं रही थी।