आकाशवाणी से पूछा गया-हां बोलिए, कहां से बोल रहे हैं? जवाब आया-हमें गाना सुनना है।
-हां... हां गाना भी सुनाएंगे, मगर यह तो बताइए, आप कहां से बोल रही हैं?
-घर से बोल रहे हैं।
-अच्छा, आपका नाम क्या है?
-मुन्नी, गाना सुनना है।
-बिल्कुल सुनाएंगे! अच्छा, मुन्नी यह बताओ कि और क्या करती हो?
-घर का काम।
-अच्छा, खाना बना लेती हो?
-हां, दाल-चावल सब बना लेते हैं।
-और तुम्हारे शौक क्या-क्या हैं?
-रेडियो सुनते हैं... गाना सुनना है।
-परिवार में कौन-कौन हैं?
-सभी हैं।
-तुम इतना कम क्यों बोलती हो?
-बिल बढ़ रहा है न...।
-अपने बारे में कुछ और बताओ।
-हम क्या बताएं, गाना सुनना है...।
-फिल्में देखती हो?
-हां... गाना सुनना है।
-हां, हम गाना सुनाने के लिए ही तो बैठे हैं। अच्छा बताओ, घर में कौन-कौन रेडियो सुनता है?
-जो भी घर में होता है, वही सुनता है, क्योंकि हमारे यहां टीवी नहीं है।
-घर के सभी लोग रेडियो ही सुनते हैं?
-हां, बजता रहता है, तो सभी सुनते हैं। नहीं सुनें, तो और क्या करें... गाना सुनना है।
-अच्छा, नए गाने अच्छे लगते हैं या पुराने...?
-पुराने भी और नए भी। ... हम फोन बंद कर रहे हैं।
-कौन-सा गाना सुनना है... यह तो बता दो...।
-अभी याद था, अब भूल गए...अपनी पसंद का ही सुना दो।
-तो ठीक है...। और गाना बजने लगता है।
ऐसे पूरी होती हैं लोगों की फरमाइशें! ट्राइ करके देख लें। देखने में क्या हर्ज है।