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कम नहीं हुई मौत की सजा

Thu, 07 Jan 2016 02:17 PM IST
सोमिनी सेनगुप्ता
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दुनिया भर में फांसी की सजा के मामले धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। अब दो दर्जन से भी कम देश सजा देने के इस तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। फिलहाल, कुछ गिने-चुने देश ही अहिंसक अपराधों के लिए मौत की सजा देने के पक्ष में हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी देश हैं, जहां मृत्युदंड को बंद कर दिया गया था, लेकिन वहां आतंकवाद के मामलों को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से शुरू कर दिया गया है।
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एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, 2014 में 2,466 लोगों को मौत की सजा दी गई थी। यह संख्या 2013 के मुकाबले 28 प्रतिशत अधिक है। मौत की सजा देने वाले देशों में पश्चिम एशिया, खासतौर पर ईरान और सऊदी अरब प्रमुख हैं। हाल में सऊदी अरब में शिया मौलवी शेख निम्र अल-निम्र को मौत की सजा के बाद इन दोनों देशों के बीच न केवल राजनयिक रिश्तों पर असर पड़ा है, बल्कि उस क्षेत्र में सांप्रदायिक संकट भी खड़ा हो गया है।

मानवाधिकार संस्थानों की मानें, तो मौत की सजा देने वाले देशों में चीन सबसे ऊपर है। हालांकि, इससे जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि चीन में मौत की सजा गुप्त रखी जाती है। संयुक्त राष्ट्र भी मानता है कि चीन में सबसे ज्यादा मौत की सजा दी जाती है। अनुमान लगाया जाता है कि 1993 से 2003 के बीच चीन में 6,687 लोगों को मौत की सजा दी गई।अमेरिका और इराक उन पांच प्रमुख देशों में शामिल हैं, जहां सर्वाधिक मौत की सजा दी जाती है।
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हाल में मंगोलिया और सूरीनाम समेत 105 देश मौत की सजा को खत्म कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 60 अन्य देशों में मौत की सजा के प्रावधान हैं, मगर पिछले एक दशक में वहां इस सजा को अमल में नहीं लाया गया है। सिर्फ 28 देश ऐसे हैं, जहां मौत की सजा पिछले एक दशक के दौरान दी गई है। संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार संबंधी मामलों के सहायक महासचिव ईवान सिम्नोविक ने कहा है, 'अब जबकि ज्यादातर देशों में मौत की सजा पर पाबंदी लगा दी गई है, ऐसे में मृत्युदंड के मामलों में बढ़ोतरी एक विरोधाभास पैदा कर रही है। आतंकवाद और ड्रग्स से जुड़े अपराधों को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि, इसके घातक परिणाम से जुड़े तथ्य अभी तक नहीं मिले हैं।'

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2014 में सऊदी में 90 लोगों को मौत की सजा दी गई। जबकि ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, पिछले साल सऊदी अरब में 158 कैदियों को मौत की सजा दी गई। अल निम्र पर लगाए गए आरोपों में सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप भी शामिल था। सिमोनोविक ने कहा, 'अल निम्र को दी गई सजा अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं के उलट है, जिसमें महज गंभीर अपराधों में ही मौत की सजा का प्रावधान है।' हालांकि सऊदी अरब ने शेख के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दावा किया है। सऊदी अरब, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का निर्वाचित सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने भी सऊदी अरब के विदेश मंत्री को फोन करके मौत की सजा पर अपनी निराशा जाहिर की है।

ईरान में 2014 में 289 लोगों को मौत सजा मिली है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, इनमें ड्रग्स से जुड़े अपराध के मामले भी शामिल हैं। ईरान में हाल में एक महिला, जिसे 16 साल की उम्र में शादी के लिए मजबूर किया गया था, को अपने पति की हत्या के आरोप में मौत की सजा दी गई है।

कुछ देशों ने लंबे समय तक मौत की सजा पर पाबंदी लगाए रखने के बाद उसे दोबारा शुरू दिया है। 2014 के अंत में जॉर्डन और पाकिस्तान ने खासतौर पर आतंकवाद के मामलों को ध्यान में रखते हुए मौत की सजा को दोबारा शुरू कर दिया। अनुमान है कि तब से पाकिस्तान में 300 लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है। उसी साल, मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक, जो हिंसक राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल थे, को विभिन्न मौकों पर मौत की सजा दी गई।

यह सही है कि अमेरिका सबसे ज्यादा मौत की सजा देने वाले प्रमुख पांच देशों में शामिल है, इसके बावजूद वहां सरकार इसके सीमित उपयोग को लेकर प्रयास कर रही है। वहां कम से कम 12 प्रांत ऐसे हैं, जहां पर मौत की सजा पर पाबंदी अथवा आधिकारिक नियंत्रण है। कई अन्य प्रांतों के न्यायालय फांसी से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए घातक इंजेक्शन के उपयोग पर विचार कर रहे हैं।

भारत दुनिया में दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है और यहां भी मौत की सजा अभी बरकरार है। 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के मामले में कुछ महीने पहले एक फांसी की सजा दी गई है। मुंबई हमले का दोषी याकूब मेमन सिर्फ चौथा ऐसा व्यक्ति था, जिसे 2000 से अब तक फांसी दी गई है। हालांकि, 2014 में मुंबई की एक फोटो पत्रकार के बलात्कार के जुर्म में नए यौन अपराध कानूनों के तहत तीन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है।

इस्लामी देशों की सरकारों की मानें, तो शरिआ कानूनों के मुताबिक मौत की सजा को जायज ठहराया गया है। लेकिन, लगभग हर महाद्वीप में मौत की सजा का प्रावधान मौजूद है। उदाहरण के लिए, दक्षिण अमेरिका में त्रिनिडाड एवं टोबैगो में अभी मौत की सजा दी जाती है, ठीक उसी तरह, जैसा कि अफ्रीकी देशों, गिनी और जिम्बाब्वे में इसका चलन है। सऊदी अरब में दी गई फांसी की सजा के बारे में हाल में जारी किए गए सुरक्षा परिषद के बयान में जिक्र नहीं था। बयान में तेहरान स्थित सऊदी अरब के दूतावास में लूटपाट और आगजनी की निंदा की गई है। हाल में अमेरिका में सऊदी अरब के राजदूत, अब्दल्लाह अल-मौआलिमी ने पत्रकारों को बताया था कि 47 कैदियों को राजद्रोह एवं आतंकी गतिविधियों में मदद के लिए मौत की सजा दी गई है। अब्दल्लाह पहले ही सुरक्षा परिषद से बयान जारी कर सऊदी अरब के दूतावास पर हमले की निंदा से समर्थन जुटाने की उम्मीद जाहिर कर चुके थे।
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