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युद्ध की गूंज: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा जंग का खिंचना, हानि से अछूता नहीं रहेगा भारत

अमर उजाला Published by: Pavan Updated Mon, 02 Mar 2026 07:51 AM IST

सार

अमेरिका इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अगर जल्द नहीं रुका, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तो घातक होगा ही, इसकी गूंज भारत के लिए भी कूटनीतिक एवं आर्थिक असमंजस का कारण बन सकती है।
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युद्ध की गूंज - फोटो : अमर उजाला


हमलों की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद कर दिया है, जिससे दुनिया भर की तेल व गैस आपूर्ति का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। अगर यह लड़ाई लंबी चलती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति घट जाएगी और उसकी कीमतें आसमान छूने लगेंगी। यही नहीं, इस जंग की वजह से वैश्विक शेयर बाजार में भी उथल-पुथल की आशंका है, जो इस साल ट्रंप के टैरिफ और तकनीकी क्षेत्र में भारी बिकवाली की वजह से पहले ही बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देख चुका है। इससे वित्तीय बाजार पर भी भारी असर पड़ सकता है, क्योंकि शेयर बाजार के अस्थिर होने पर निवेशक सोने-चांदी की तरफ रुख करेंगे, जिसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर पर रही है।


ईरान ब्रिक्स का एक महत्वपू्र्ण सदस्य है, जिसकी अध्यक्षता अभी भारत के पास है, ऐसे में इस युद्ध से भारत के लिए असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। इसलिए हमेशा से शांति और संवाद के समर्थक भारत ने उचित ही कहा है कि 'तनाव कम करने और संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए तथा सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।' चूंकि खाड़ी क्षेत्र में बहुत से भारतीय रहते हैं और खाड़ी देशों से हमारे व्यापारिक रिश्ते भी हैं, इसलिए भारत की चिंता स्वाभाविक है।


खाड़ी देशों में अस्थिरता बढ़ने से उस क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और उनके द्वारा भेजे जाने वाले धन के प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी करके उस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। हालांकि भारत ईरान से तेल आयात नहीं करता, लेकिन भारत में तेल होर्मुज स्ट्रेट से ही होकर आता है, जिसके बाधित होने पर देश में ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने के साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी और उससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की रक्षा, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना और दोनों पक्षों के साथ अपने हितों को संतुलित रखना है। इस चुनौतीपूर्ण घड़ी में भारत ने सभी पक्षों से संयम, संवाद और कूटनीति की राह पर लौटने की जो अपील की है, उसकी गंभीरता समझी जा सकती है।
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