ईरान के शाह एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त हो गए थे। हकीमों ने उनकी शारीरिक जांच के बाद कहा कि यदि अमुक लक्षणों वाले किसी जवान व्यक्ति का पित्ताशय मिल जाए, तो शाह के प्राण बचाए जा सकते हैं।
शाह के कर्मचारी ऐसे व्यक्ति की तलाश में निकल पड़े। उन्हें उन लक्षणों वाला एक युवक मिला। वह काफी गरीब परिवार का था। कर्मचारियों ने जब उस युवक के बदले में सोने की मुद्राएं देने की पेशकश की, तो लालच में उसके पिता ने सहज भाव से उसे कर्मचारियों के हवाले कर दिया। ईरान के काजी ने भी फतवा जारी कर दिया कि बादशाह का जीवन बचाने के लिए किसी एक व्यक्ति के प्राण लेना कोई गुनाह नहीं है।
फिर क्या था, युवक की हत्या कर पित्ताशय निकालने की तैयारी की जाने लगी। जल्लाद को देखते ही युवक ने आकाश की ओर देखकर कुछ बुदबुदाया। बादशाह ने यह देखा, तो उन्होंने उससे पूछा, बेटा, तुम आकाश की ओर क्या देख रहे थे। उस युवक ने जवाब दिया, बादशाह सलामत, मैं धन के लालच में पुत्र को मौत को सौंप देने और काजी द्वारा निरपराध की हत्या को सही ठहराने जैसे गुनाहों की जानकारी खुदा को दे रहा था। मैं कह रहा था, खुदा तू तो परवरदिगार है, अब अपना जीवन तुझे सौंप रहा हूं।
ये शब्द सुनकर बादशाह की आंखें खुल गईं। उन्होंने तत्काल उस युवक को छोड़ देने का आदेश दे दिया।