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अमेरिका में अवैध प्रवास: अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आदर्श की स्थापना हुई, अब भारत में गंभीर आत्मनिरीक्षण जरूरी

अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 06 Feb 2025 04:56 AM IST

सार

प्रधानमंत्री मोदी की संभावित अमेरिकी यात्रा से करीब एक हफ्ते पहले ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू की गई भारतीय अवैध प्रवासियों के वापसी की प्रक्रिया को भारत द्वारा दिया जा रहा सहयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक आदर्श स्थापित करता है, लेकिन यह भारत के लिए गंभीर आत्मनिरीक्षण का भी विषय है।
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अमेरिकी एयरफोर्स का विमान - फोटो : अमर उजाला


अमेरिकी आंकड़े बताते हैं कि 2024 में अवैध ढंग से अमेरिका पहुंचने वाले लोगों में मेक्सिको, वेनेजुएला और ग्वाटेमाला जैसे लैटिन अमेरिकी देशों की तुलना में भारतीयों की तादाद तीन फीसदी ही रही थी, लेकिन इस संख्या का लगातार बढ़ना भी एक तथ्य है। चूंकि भारत अवैध प्रवासन का समर्थन कतई नहीं करता और जैसा विदेश मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं, बात सिर्फ अमेरिका की नहीं है, अगर कोई भारतीय नागरिक दुनिया के किसी भी देश में अवैध रूप से रहता हुआ पाया जाता है, तो भारत उसे वापस लाने की प्रक्रिया का समर्थन करता है।


ध्यान रखा जाना चाहिए कि यह कोई पहली बार नहीं है, जब अमेरिका से अवैध प्रवासियों को भारत वापस भेजा गया हो। पिछले वर्ष अक्तूबर में करीब सौ लोगों को और 2023-24 में अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे एक हजार से ज्यादा लोगों को भारत भेजा गया था। लेकिन इसके लिए महंगे सैन्य विमान का उपयोग बेशक चौंकाने वाला है। अवैध आप्रवासियों का मुद्दा ट्रंप के चुनावी अभियान में केंद्रीय रहा था, और मुमकिन है कि सैन्य विमानों के इस्तेमाल से वह अपने समर्थकों को खुश करने के साथ यह संदेश भी देना चाह रहे हों कि अमेरिका अवैध प्रवासियों को कितना बड़ा खतरा मानता है।


पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभालने के बाद, अमेरिका की एजेंसियों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ जो अभियान छेड़ा हुआ है, उसे कठोर कहने वाले भी हैं, लेकिन शायद यही ट्रंप की शैली है। अलबत्ता भारत के नजरिये से यह जरूर एक गंभीर विषय है। अवैध रूप से विदेश जाने के लिए लोग अक्सर लाखों रुपये खर्च कर डंकी रूट या दूसरे खतरनाक रास्तों का उपयोग करते हैं, जो न केवल उनके जीवन के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि मानव तस्करी जैसे अपराधों को भी बढ़ावा देता है।


सवाल उन परिस्थितियों पर भी उठने चाहिए, जिनसे बचने के लिए देश के युवा इतना जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। जो वापस आ रहे हैं, उनके सहारे उन माफियाओं तक तो पकड़ बनाई जा सकती है, जो लोगों को अवैध ढंग से दूसरे देशों में भेजने के काम में लिप्त हैं, ताकि देश के युवाओं की ऊर्जा यों बर्बाद होने से रोकी जा सके।

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