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टैरिफ का सामना किया जा सकता है: जहां तक व्यापार की मात्रा का प्रश्न है, व्यापार संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं

पिनाकी चक्रवर्ती
Updated Wed, 01 Oct 2025 04:35 AM IST

सार

ट्रंप के टैरिफ के बीच अगस्त में जारी अमेरिका-भारत व्यापार के आंकड़े दर्शाते हैं कि जहां तक व्यापार की मात्रा का प्रश्न है, व्यापार संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, अलबत्ता इसमें वृद्धि ही हुई है। सितंबर के आंकड़े अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे, लेकिन यह तय है कि टैरिफ का सामना किया जा सकता है।
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भारत पर ट्रंप की टैरिफ नीति का असर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / एडॉब स्टॉक


भारत के कई व्यापारिक साझेदार देश भी ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित हुए हैं। जाहिर है, इसका निश्चित रूप से भारत से दुनिया के अन्य देशों को किए जाने वाले व्यापार की मात्रा पर असर पड़ा है। इन दोनों घटनाओं ने भारत के व्यापार को किस प्रकार प्रभावित किया है, इसे गहराई से समझने की आवश्यकता है। चूंकि, टैरिफ व्यापार को प्रभावित करता है, इसलिए प्रभावित देश इसके प्रभावों से निपटने के लिए विभिन्न तरीकों से रणनीतियां बनाते हैं। वैश्विक स्तर पर, अगर हम देखें, तो कई देशों ने अमेरिकी टैरिफ के जरिये लगाए गए व्यापार संरक्षणवाद से निपटने के लिए कई नीतिगत हस्तक्षेप किए हैं। जैसा कि सबको पता है, देशों द्वारा अपनाए गए कुछ उपायों में देश-विशिष्ट व्यापार समझौते, प्रभावित क्षेत्रों को सब्सिडी जैसे राजकोषीय उपाय और ब्याज सहायता योजनाएं शामिल हैं। भारत में उद्योग मंत्री पीयूष गोयल कह चुके हैं कि भारत अमेरिका, न्यूजीलैंड, ओमान, पेरू, चिली और यूरोपीय संघ सहित कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझातों (एफटीए) पर बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही कतर और बहरीन भी भारत के साथ व्यापार समझौते के इच्छुक हैं। 


चूंकि, अमेरिकी व्यापार शुल्क मुख्यतः व्यापारिक वस्तुओं पर लागू होते हैं, इसलिए व्यापारिक वस्तुओं पर उनके प्रभाव का आकलन करना कम कठिन है और इसे समझना भी आसान है। जबकि सेवाओं के निर्यात और आयात पर संरक्षणवादी उपायों के परोक्ष प्रभाव का विश्लेषण करना ज्यादा जटिल है। तो आइए, सबसे पहले हम व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात की बात करते हैं। अगस्त 2025 के लिए व्यापारिक निर्यात का आंकड़ा 351 लाख अमेरिकी डॉलर था, जबकि अगस्त 2024 के लिए यह 328.9 लाख अमेरिकी डॉलर था-यानी 22.1 लाख अमेरिकी डॉलर की वृद्धि। हालांकि, इसी अवधि के दौरान कॉफी, मसाले, काजू, खाद्य तेल, लौह अयस्क, सूती धागा/कपड़े, तथा प्लास्टिक और लिनोलियम के क्षेत्रों में मूल्य के मामले में निर्यात में गिरावट देखी गई। सबसे अधिक गिरावट लौह अयस्क के निर्यात में -33.36 फीसदी रही। इंजीनियरिंग सामान, जो अमेरिका को निर्यात का एक प्रमुख घटक है, इसी अवधि में 9.4371 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 9.9009 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया-यानी 4.91 फीसदी की मामूली वृद्धि। इसी अवधि के दौरान व्यापारिक आयात का निरपेक्ष मूल्य 685.3 लाख अमेरिकी डॉलर से घटकर 615.9 लाख अमेरिकी डॉलर रह गया है-यानी 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट। आयात में यह गिरावट मुख्यतः सोने और चांदी के आयात में गिरावट के कारण हुई है। 


अगस्त 2024 और अगस्त 2025 के बीच सोने के आयात में -57 फीसदी और चांदी के आयात में-60 फीसदी की गिरावट आई। अगस्त 2024 की तुलना में अगस्त 2025 के दौरान आयात में महत्वपूर्ण संकुचन वाले अन्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं-दालें, कोयला, लकड़ी और लकड़ी के उत्पाद, चमड़ा और चमड़े के उत्पाद और परिवहन उपकरण। आयात के इन आंकड़ों से कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि आयात के संबंध में सभी क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है। ऐसा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अल्प से मध्यम अवधि में निर्यात की मांग में गिरावट की आशंका के कारण हो सकता है, खासकर जब कई क्षेत्रों में निर्यात की तुलना में आयात की तीव्रता बहुत अधिक है। 


अध्ययनों से पता चला है कि कुछ क्षेत्रों में, भारत की आयात तीव्रता निर्यात की तुलना में 50 फीसदी से अधिक है। आयात के प्रति सतर्क रुख शायद ट्रंप के टैरिफ के चलते भविष्य में निर्यात मांग में सुस्ती की आशंका के कारण है। अगस्त 2024 से अगस्त 2025 के बीच भारत द्वारा कच्चे तेल के आयात में 9.69 फीसदी की वृद्धि हुई। इस दौरान, अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 7.15 फीसदी की दर से बढ़ा। अप्रैल 2025 से अगस्त 2025 तक, अमेरिका को निर्यात में 18.06 फीसदी की वृद्धि हुई।

आइए, अब हम सेवाओं के निर्यात और आयात के आंकड़ों पर गौर करें। अगस्त 2024 और अगस्त 2025 के बीच सेवाओं का निर्यात 303.6 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 340.6 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया और सेवाओं का आयात 164.6 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 174.5 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया। ये सभी व्यापक आंकड़े दर्शाते हैं कि जहां तक अमेरिका-भारत व्यापार की मात्रा का प्रश्न है, व्यापार संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। वास्तव में, अगस्त महीने में इसमें वृद्धि ही हुई है। सितंबर महीने के व्यापार आंकड़े जारी होने पर ही स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।


जाहिर है, वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने टैरिफ के प्रभाव से निपटने के लिए ढेरों संभावनाएं हैं, क्योंकि वह ट्रंप के टैरिफ से उपजी अनिश्चितताओं से जूझ रही है। देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते और भी मजबूत हुए हैं। यदि ऐसा कोई उपाय सफल होता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ट्रंप टैरिफ और संरक्षणवादी व्यापार व्यवस्था के नकारात्मक प्रभावों का एक बड़ा हिस्सा कम किया जा सकता है। अब यह केवल समय ही बता सकता है कि व्यापार से संबंधित संरक्षणवादी उपायों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मदद मिली या इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में पहले से ही उच्च स्तर की आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ गई, जिसका खामियाजा अमेरिका को भी भुगतना पड़ा।

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