इस संदर्भ में शशि थरूर को लेकर कांग्रेस में जो सुगबुगाहट है, वह अनावश्यक ही है, जिसे टाला जा सकता था। अगर राजनीतिक दल साथ में आ रहे हों, तो इसमें संशय नहीं होना चाहिए। नहीं भूलना चाहिए कि इस बीच कई लोगों ने विभिन्न स्तरों पर ऐसे बयान दिए, जो भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए गए।
पाकिस्तान सोशल मीडिया पर जो झूठ फैला रहा है, वे तो खतरनाक हैं ही, सोशल मीडिया पर तैर रही टिप्पणियों का भी पाकिस्तान और उसके समर्थकों ने अपने ढंग से इस्तेमाल किया। हरियाणा पुलिस ने ट्रैवल ब्लॉगर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान तक खुफिया जानकारियां पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है, लेकिन उनसे अलग भी प्रकारांतर से पाकिस्तान की दुष्प्रचार मशीन का हिस्सा बनने वाले देश के विरुद्ध ही काम करते हैं, जिनका सिरा जब कहीं और मिलता है, तभी वह खबरों में आ पाता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि लोग भी समुचित सतर्कता बरतें।
इंटरनेट के युग में सूचनाओं के असीम प्रवाह को देखते हुए तो यह और भी जरूरी हो जाता है। दुष्प्रचार का जवाब तो हमीं को देना होगा। ऐसे में, भारत के पक्ष को स्पष्ट करने का एक बेहतर राजनीतिक तरीका निकाला गया है। इसमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सबको साथ आना ही चाहिए। सर्वदलीय पहल का एक अन्य अहम पहलू यह भी है कि यह भारत को वैश्विक मंच पर अपनी बात रखने का अवसर देगा।
पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने के ठोस सबूतों को प्रस्तुत करके, भारत अतंरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझाने में भी सक्षम होगा कि आतंकवाद न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है। यह कदम उन देशों को भी दबाव में लाएगा, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन करते हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल भारत की नहीं है, अलबत्ता यह तो वैश्विक शांति की लड़ाई है और सर्वदलीय पहल यही बताती है कि भारत इस दिशा में नेतृत्व करने को तैयार है।