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यूएन में पीएम रहमान का भाषण: बांग्लादेश से अवामी लीग के नेताओं व हिंदुओं के दमन जैसी खबरें, ढाका किस राह पर?

सार

तारिक रहमान यूएन में अपने भाषण की वजह से बेशक सुर्खियों में हों, पर उनकी सरकार के कट्टरपंथियों के साथ मिलकर अवामी लीग के नेताओं व हिंदुओं के दमन का अभियान चलाने की जो खबरें आ रही हैं, उससे सवाल तो उठता है कि बांग्लादेश आखिर जा किस दिशा में रहा है।
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यूएनजीए में तारिक रहमान के भाषण की चर्चा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली यात्रा और अपने भाषण से भले ही तारीफ पा रहे हों, लेकिन उनकी सरकार ने देश के कट्टरपंथी इस्लामी विपक्ष के साथ कथित तौर पर गुप्त बातचीत कर पूर्व सत्ताधारी अवामी लीग के खिलाफ कई कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है। इनमें देश में अब भी सक्रिय अवामी लीग के शीर्ष नेताओं की ‘लक्षित हत्याएं’ भी शामिल बताई जा रही हैं।

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बांग्लादेश के वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों के अनुसार, अवामी लीग को खत्म करने की यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने की घोषणा को देखते हुए बनाई गई है। अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन यह अब भी देश की प्रमुख जन-पार्टी बनी हुई है। शेख हसीना ने पश्चिमी और भारतीय मीडिया को दिए कई साक्षात्कारों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि ‘वे मेरे लिए जेल और फांसी का फंदा तैयार रखें।’ वह दिसंबर में अपनी पार्टी के नेताओं के साथ भारत से बांग्लादेश लौटेंगी। दिसंबर वही महीना है, जब 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के बाद बांग्लादेश का गठन हुआ था।

बांग्लादेश के एक वरिष्ठ सैन्य खुफिया अधिकारी के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी से जुड़े सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने हसीना की वापसी के बाद अवामी लीग के संभावित जन-आंदोलन को रोकने के लिए कई दमनकारी कदम तय किए हैं। इस गुप्त योजना समूह के नेता ब्रिगेडियर अब्दुल्लाहिल अमान आजमी ने हाल ही में बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और अन्य इस्लामी पार्टियों के बीच ‘पूर्ण एकता’ का आह्वान किया था, ताकि ‘फासीवादी खतरे’, यानी अवामी लीग का मुकाबला किया जा सके।
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1971 के युद्ध के समय जमात-ए-इस्लामी के अमीर रहे गुलाम आजम के बेटे आजमी ने यह विस्तृत योजना तैयार की है। बताया जा रहा है कि इसे बीएनपी सरकार, जमात-ए-इस्लामी, अन्य इस्लामी पार्टियों और सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने मंजूरी दी है। योजना में इस्लामी कट्टरपंथियों के जरिये बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में अवामी लीग के 15 से 20 प्रभावशाली नेताओं की लक्षित हत्या शामिल है। साथ ही, पुलिस को अवामी लीग के कम प्रभावी नेताओं और उनके करीबियों को फंसाकर गिरफ्तार करने का काम सौंपा जा रहा है। इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा लक्षित हत्याओं और पुलिस की गिरफ्तारियों का उद्देश्य अवामी लीग की जन-लामबंदी की संभावित योजना को कमजोर करना है। यह जन-लामबंदी आसमान छूती कीमतों, बिजली और ईंधन की भारी कमी तथा बीएनपी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर  बड़े पैमाने पर की जा रही जबरन वसूली से जनता में पैदा हुए गुस्से को आधार बनाकर करने की योजना है।

‘ऑपरेशन दोमोन’ (दमन) का तीसरा पहलू हिंदुओं की लक्षित हत्याएं और जबरन वसूली है। इसका उद्देश्य भारत की सरकार पर दबाव बनाना है, ताकि वह हसीना और अवामी लीग का समर्थन करना छोड़ दे। इसका चौथा पहलू अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण में अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमों में फैसले तेजी से कराना और मौत की सजा पाए नेताओं को फांसी देना है। ये नेता अगस्त 2024 से जेल में हैं, जब हसीना सरकार को हटा दिया गया था। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने मुख्य सलाहकार बनने के बाद क्लिंटन फाउंडेशन में एक व्याख्यान के दौरान कथित तौर पर स्वीकार भी किया था कि हसीना को सत्ता से हटाना अचानक हुए जन-आंदोलन का परिणाम नहीं, बल्कि ‘बहुत सोच-समझकर तैयार किए गए ऑपरेशन’ का नतीजा था।

जब आजमी और उनके सहयोगी ‘ऑपरेशन दमन’ की योजना बना रहे थे, तब इसी गुट के एक बड़े नेता और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (डीजीएफआई) के पूर्व प्रमुख रेज्जाकुल हैदर चौधरी हथियारों की खरीद के लिए तुर्किये के दौरे पर थे। इन हथियारों का इस्तेमाल प्रस्तावित इस्लामी मिलिशिया के लिए किया जाना था, जिसे अब आर्म्ड रिजर्व की आड़ में तैयार किया जा रहा है। इसके लिए करीब 8,800 कट्टरपंथी मुस्लिम युवाओं को चुनकर एक महीने की लड़ाकू ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि यह आर्म्ड रिजर्व विदेशी हमलावरों से नहीं, बल्कि वास्तव में ‘आंतरिक दुश्मनों’ से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।

डीजीएफआई के बांग्लादेशी सैन्य खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस ऑपरेशन को अंतिम रूप देने की रणनीतिक योजना जुलाई में शुरू हुई थी। पाकिस्तान और तुर्किये के खुफिया अधिकारी आजमी के कार्यालय में नियमित रूप से आते-जाते हैं। ढाका में पाकिस्तान के राजदूत इमरान हैदर पिछले कुछ महीनों से नियमित रूप से इस्लामी अनाथालयों, यानी यतीमखानों का दौरा कर रहे हैं। वहां वह ‘प्रतिभाशाली छात्रों’ की पहचान कर उन्हें पाकिस्तान में उच्च शिक्षा दिलाने की व्यवस्था कर रहे हैं। बांग्लादेश नेशनल सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस (एनएसआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी एजेंसी ने इसे बांग्लादेश और पड़ोसी भारतीय राज्यों में इस्तेमाल के लिए आत्मघाती हमलावरों के दस्ते तैयार करने की कोशिश के तौर पर चिह्नित किया है। हाल ही में जमात-ए-इस्लामी ने ढाका से चटगांव तक लंबा जुलूस निकाला। हालांकि, वास्तव में इस जुलूस की आड़ में वाहनों के काफिले ने तुर्किये से आए हथियारों की एक बड़ी खेप उठाई। ये हथियार एक पाकिस्तानी जहाज के जरिये बंदरगाह शहर लाए गए थे और कंटेनरों पर ‘क्रिकेट का सामान’ लिखा हुआ था। चटगांव के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने वहां से कम से कम 10,000 असॉल्ट राइफलें और अलग-अलग तरह का गोला-बारूद हटा लिया।

बांग्लादेश के खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर में ‘ऑपरेशन दमन’ शुरू हो चुका था। अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं, जिनमें पार्टी के महासचिव ओबैदुल कादर भी शामिल हैं, को मौत की सजा सुनाई गई। देशभर में हुए हमलों में अवामी लीग के 17 नेताओं की हत्या कर दी गई। पूरे देश में पार्टी के करीब 2,500 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की भी खबरें आईं। जाहिर है, बीएनपी सरकार ने पीएम तारिक रहमान की संयुक्त राष्ट्र यात्रा को देखते हुए दमन अभियान को कम करके दिखाया, पर शेख हसीना की वापसी से पहले इसकी तीव्रता में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।

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