दुनिया भर में सरकारें सामाजिक सुरक्षा के कार्यक्रम चलाती हैं। इसका उद्देश्य है पुनर्वितरण के माध्यम से समाज में असमानताओं को कम करना। इनके पीछे यह सोच है कि समाज में गरीबी ऐसे कारणों से उत्पन्न होती है, जिन पर काफी हद तक व्यक्ति का नियंत्रण नहीं है। हम किस परिवार में पैदा होते हैं, वह एक लॉटरी के समान है। और हमारा जन्म जिंदगी में हमारी नियति तय कर देता है। इसे इस तरह से समझा जा सकता है : जिंदगी की दौड़ में हम सबके लिए स्टार्टिंग लाइन या शुरुआती रेखा एक ही जगह नहीं है।
कुछ लोग पैदाइश से ही आगे शुरुआत करते हैं; यदि आप ग्रामीण परिवार में पैदा होंगे, तो शहरी लोगों से पिछड़ने की आशंका ज्यादा हो जाएगी। यदि आप लड़की के रूप में पैदा होंगी, तो स्वाभाविक ही लड़कों की तुलना में कम तरक्की कर पाएंगी। क्षेत्र, लिंग, वर्ग, जाति-ये वस्तुतः ऐसे लक्षण हैं, जो हम नहीं चुनते, लेकिन सच्चाई यह है कि इन्हीं से हमारी जिंदगी का सफर काफी हद तक तय हो जाता है। इसका असर हमारे स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि यानी जिंदगी के हर पहलू पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में सरकारों की ओर से सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाएं इस उद्देश्य से चलाई जाती हैं कि जन्म से जुड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों पर कुछ हद तक विजय पाई जा सके।