किसी छोटे गांव में दस लोगों को मार दिया जाए तथा दो दर्जन के आसपास घायल हों, तो वहां क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के घोरावल इलाके के उम्भा गांव में यही हुआ। जमीन विवाद भारत के हर गांव और शहर में है। किसी कानून के राज में चाहे जमीन का जितना बड़ा विवाद हो, इस तरह सरेआम हिंसा का दुस्साहस करने का उदाहरण अत्यंत कम मिलेगा। अंडरवर्ल्ड और अपराधी गिरोह एक समय शहरों में जमीन हथियाने के लिए अवश्य कभी-कभी ऐसा करते थे। किंतु वह भी बीते दिनों की बात हो गई।
जमीन को लेकर विवाद काफी पुराना है। ग्राम प्रधान का कहना था कि उसने जमीन खरीदी है तथा प्रशासन ने भी उस पर मुहर लगा दी है, लेकिन स्थानीय लोग उसे कब्जाए बैठे हैं। ग्राम प्रधान अचानक भारी संख्या में ट्रैक्टर, और लोगों को लेकर खेतों की जुताई कराने लगा। स्थानीय निवासियों ने, जो आदिवासी हैं, विरोध किया तो उन पर हमला किया गया। उन्होंने भी प्रति हमला किया। दोनों तरफ से ईंट, पत्थर, ढेले, लाठी, गंड़ासा आदि से लड़ाई हुई, किंतु ग्राम प्रधान की ओर से अचानक गोलियां चलने लगीं एवं फिर लोग ढेर होते चले गए।