अगर कोई भारत और पाकिस्तान का फर्क समझना चाहता है, तो उसे उन दो भाषणों का विश्लेषण करना चाहिए, जो पिछले सप्ताह इन दो देशों के प्रधानमंत्रियों ने अपने-अपने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पहले बोले, क्योंकि पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस एक दिन पहले आता है। मैंने बहुत ध्यान से इमरान खान का वह भाषण सुना और सुनने के बाद ऐसा लगा कि दो देशों के बीच अमन-शांति की आशा करना भी अब बेकार हो गया है।
कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 का हटाया जाना अगर हमारी सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है, तो सरकार के लिए घाटी में शांति लाना उतना आसान नहीं होगा, जितना हम समझते हैं। घाटी का अतीत बताता है कि वहां की अशांति हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या बन सकती है। जबकि कश्मीर घाटी में अशांति फैलना पाकिस्तान के लिए उतना ही फायदेमंद है। सो अनुच्छेद 370 के रद्द किए जाने के बाद उनको खुश होना चाहिए। लेकिन इतने परेशान दिखे इमरान खान कि उनका पूरा भाषण धमकियों से भरा हुआ था।
उनकी भाषा और हाफिज सईद जैसे जेहादी आतंकवादियों की भाषा में अंतर तक नहीं रह गया है। सो मोदी की तुलना इमरान ने हिटलर से की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच को उन्होंने नाजी पार्टी की सोच बताया। अपने भाषण में उन्होंने कई बार इशारा किया कि अब भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि आरएसएस की सोच में मुसलमानों के लिए नफरत है। उनकी यह बात सुनकर मेरे मन में सवाल उठा कि उनके देश में जो जेहादी संस्थाएं हैं, उनकी विचारधारा के बारे में उनका क्या ख्याल है। हाफिज सईद के भाषणों में उनको भारत के लिए प्रेम दिखता है या नफरत? पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पूरा भाषण भारत के बारे में था और कश्मीर इस भाषण का केंद्रबिंदु था। इधर 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से जब नरेंद्र मोदी बोले, तो उन्होंने आतंकवाद का जिक्र जरूर किया, लेकिन पाकिस्तान का नाम लिए बिना। उनका अधिकतर भाषण उन चीजों के बारे में था, जिनसे भारत में प्रगति आ सकती है। जल जीवन मिशन की बातें कीं उन्होंने। गरीबी हटाने की बातें की यह कहकर कि उनकी कोशिश पिछले पांच वर्षों में गरीबों को वह औजार देने की रही है, जिनसे वे खुद अपनी गरीबी समाप्त करने में भागीदार बन सकें। उन्होंने अच्छी शिक्षा संस्थाओं, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड की सुविधा आदि पर बड़े पैमाने पर निवेश करने की बातें कीं।
बुनियादी क्षेत्र की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आधूनिक सड़कें, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, स्कूल और अस्पताल के निर्माण पर सौ लाख करोड़ रुपये निवेश करने जा रही है। किसानों के उत्पाद विदेशी बाजारों में बेचने के लिए निर्यात की सुविधाएं उपलब्ध कराने की उन्होंने बातें कीं। ऐसा नहीं था कि देश की सुरक्षा को वह बिल्कुल भूल गए हों। उन्होंने इसमें भी सुधार लाने की बातें कीं।
दोनों भाषण सुनने के बाद मुझे ऐसा लगा कि दो देशों के बीच दूरियां बढ़ने वाली हैं। पाकिस्तान जंग की दिशा में जाना चाहता है, बावजूद इसके कि वह इतना कंगाल हो चुका है कि हाल के दौर में इमरान खान का हर विदेशी दौरा आर्थिक सहायता मांगने पर केंद्रित रहा है। मोदी भारत को ले जाना चाहते हैं ऐसी दिशा में, जो हमको एक आधूनिक, शक्तिशाली देश बनाए। ना सिर्फ दोनों की सोच अलग है, बल्कि लक्ष्य भी अलग हो गए हैं।