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सुनामी या मिसाइल

Mon, 12 May 2014 07:46 PM IST
राजेंद्र शर्मा
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मामला बहुत कन्फ्यूजनात्मक हो गया है। अमित शाह की मानें, तो नरेंद्र भाई सुनामी हैं। और राजनाथ सिंह कह रहे हैं कि भाई तो मिसाइल हैं। अब पब्लिक उन्हें माने, तो क्या माने? सुनामी या मिसाइल या कुछ और! खाकी पार्टी वाले सफाई दे-देकर हार गए कि कहीं किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं है। कन्फ्यूजन तो भाई के विरोधियों ने जबर्दस्ती खड़ा किया है। वरना सुनामी कहो या मिसाइल कहो, असर एक ही होना है। दोनों में गजब की तेजी होती है। दोनों के रास्ते में जो आ जाए, उसका पता तक नहीं चलता। फिर भी, सुनामी और मिसाइल को पब्लिक एक मानने के लिए तैयार नहीं है।
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कुछ लोगों का ख्याल है कि राजनाथ सिंह की पहचान ही ज्यादा भरोसेमंद है। आखिरकार मिसाइल सिर्फ तबाही ही नहीं करती। वह एकदम ठीक जगह जाकर तबाही करती है, फिर चाहे निशाना दूर नागपुर में बैठकर ही क्यों न लगाया जाए। भाई ने इस चुनाव में लक्ष्यभेद की जैसी एकाग्रता दिखाई है, वैसी तो कोई मिसाइल ही दिखा सकती है। उन्होंने विकास का जाप किया, मंदिर का जाप कर लिया, ओबीसी को भी याद कर लिया, पर शुरू से आखिर तक नजर रही, तो सिर्फ प्रधानमंत्री की कुर्सी पर। वैसे भी राजनाथ सिंह पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनकी बात ही आधिकारिक मानी जाएगी।

लेकिन सुनामी के दावे को भी एकदम हल्के में नहीं लिया जा सकता। आखिर यह जानकारी अमित शाह ने दी है, जो पद के मामले में राजनाथ सिंह से भले ही छोटे हों, लेकिन नरेंद्र भाई के खासुलखास हैं। और इतना तो मानना पड़ेगा कि पहचान के मामले में खासुलखास की बात का वजन ज्यादा होता है। वैसे भी प्रलयंकारी विक्षोभ का जैसा इशारा सुनामी में रहता है, मिसाइल तो उसके सामने बच्चों वाला खेल ही है। जब सुनामी का विकल्प सामने हो, तो कोई भाई को मिसाइल कहकर छोटा क्यों करे? फिर राजनाथ बाबू तो खुद ही कन्फ्यूज्ड हैं कि भाई वास्तव में हैं क्या? कभी उन्हें मिसाइल बनाते हैं, तो कभी मोदीसिन की दर्द निवारक टिकिया। कौन जाने, कल और क्या बताने लगें।
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