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Venezuela: ट्रंप, वेनेजुएला और तेल बाजार की चिंताएं, कोई नहीं जानता ट्रंप का अगला कदम क्या होगा

एडी इमिरोविक, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 10 Jan 2026 07:38 AM IST

सार

असल चिंता तेल बाजार को अमेरिकी कार्रवाई के भावी परिणामों से है। ट्रंप की बढ़ती सैन्य आक्रामकता बड़े तेल उत्पादकों पर संभावित हमलों का संकेत देती है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दी वेनेजुएला को धमकी - फोटो : ANI


आज वेनेजुएला का अधिकांश तेल ब्रेंट बेंचमार्क से लगभग 25 डॉलर की छूट पर, यानी करीब 35 डॉलर प्रति बैरल में बिक रहा है। ऐसे में, वेनेजुएला का मौजूदा ‘प्रमाणित’ तेल भंडार 100 अरब बैरल से भी कम हो सकता है, यानी उसके आंकड़े के एक-तिहाई से भी कम। इसके अलावा, वेनेजुएला के तेल में सल्फर की मात्रा अधिक है, जिसे प्रसंस्कृत करने की क्षमता चुनिंदा रिफाइनरियों के पास ही है, खासकर अमेरिका, भारत, मध्य पूर्व व चीन की कुछ नई इकाइयां। यही कारण है कि वेनेजुएला का तेल भारी छूट पर बिकता है।


तेल कंपनियों के निवेश के चलते 1960 के दशक तक अमेरिका वेनेजुएला का सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बन चुका था। पर वेनेजुएला ने 1971 में अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया। इसके बाद दशकों तक वेनेजुएला का तेल क्षेत्र कई प्रतिबंधों से जूझता रहा। 2000 के दशक की शुरुआत में जहां उत्पादन करीब 30 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं पिछले वर्ष यह घटकर 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे चला गया। यह गिरावट खास तौर पर मादुरो शासन में तेज हुई, और तेल उद्योग में निवेश भी लगभग ठप रहा। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि वहां की ताजा घटनाओं का वैश्विक तेल बाजार पर तुरंत कोई बड़ा असर पड़ेगा या नहीं। पर लंबी अवधि में, युद्ध या गृहयुद्ध जैसी स्थितियों को छोड़कर, उद्योग की हालत में सुधार की गुंजाइश दिखती है। दरअसल, ट्रंप के वेनेजुएला के पांच करोड़ बैरल तेल जब्त करने के फैसले के बाद तेल की कीमतें फिर से गिर गईं। भारत समेत चीन वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीदार जरूर रहा है, पर चीन के कुल आयात में उसकी भागीदारी पांच फीसदी से भी कम थी। कनाडा भी कुछ समय से अपने तेल निर्यात को अमेरिका से चीन की ओर मोड़ रहा है।


वैसे वेनेजुएला के तेल उद्योग पर ‘कब्जा’ करने का कोई ठोस आर्थिक औचित्य नजर नहीं आता। यदि अमेरिका को वाकई वेनेजुएला का तेल चाहिए होता, तो वह 2019 में प्रतिबंधों को हटाकर अपनी तेल कंपनियों को अन्य देशों की तरह खुले बाजार से खरीदने की अनुमति दे सकता था। असल चिंता तेल बाजार को अमेरिकी कार्रवाई के दीर्घकालिक राजनीतिक परिणामों से है। राष्ट्रपति ट्रंप की बढ़ती सैन्य आक्रामकता ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक और ओपेक सदस्य पर संभावित हमलों का संकेत देती है।


कोई नहीं जानता कि ट्रंप अगला कदम क्या उठाएंगे। अमेरिकी कार्रवाई को रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले को सही ठहराने के तर्क के रूप में भी पेश किया जा सकता है। पर इस समय तेल बाजार को नए भू-राजनीतिक जोखिमों के बजाय अनिश्चितता से बचाने की जरूरत है। - द कन्वर्सेशन से

 
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