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स्वर्ग प्राप्ति का सच्चा साधन

Fri, 30 Aug 2013 08:26 PM IST
शिवकुमार गोयल
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फ्रांसिस का जन्म इटली के एक समृद्ध परिवार में हुआ था। युवावस्था में वह किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो गए। अनेक इलाजों के बाद भी जब उनके बचने की कोई आशा न रही, तो उन्होंने अपने को ईश्वर को समर्पित कर दिया। एक दिन उन्हें अनूभूति हुई कि प्रभु ईसा पास खड़े हैं और उनसे कह रहे हैं, धन-संपत्ति के मोह से मुक्त होकर अपना जीवन मानव-सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लो। प्रत्येक मानव से, यहां तक कि निरीह पशु-पक्षियों से भी प्रेम करो। मृत्यु स्वतः दूर भाग जाएगी।
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इसके बाद फ्रांसिस निरोग होते गए। एक दिन उन्होंने अपने पिता से कहा, मुझे प्रभु ईसा से इस शर्त पर जीवनदान मिला है कि मैं अपना सर्वस्व गरीबों की सेवा-सहायता में बिताऊंगा। क्रुद्ध होकर पिता ने उसे संपत्ति से वंचित कर घर से निकाल दिया। फ्रांसिस भिक्षुक बनकर दीन-दुनियों की सहायता में जुट गए।

ईसा मसीह के जन्मदिन पर एक धनी व्यक्ति ने चर्च में भव्य समारोह का आयोजन किया। फ्रांसिस ने उस व्यक्ति से कहा, ईसा इस प्रकार के निरर्थक प्रदर्शन से खुश नहीं होंगे। उन्हें खुश करना है, तो आवश्यकता के अनुसार धन-संपत्ति अपने पास रखो, शेष गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण में लगा दो। यही स्वर्ग प्राप्ति का सच्चा साधन है। उस धनी व्यक्ति ने अपनी तमाम संपत्ति जनकल्याण के कार्य में लगा दी।
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