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आईएसआई ने बिछाया है जाल

Mon, 04 Jan 2016 07:54 PM IST
रवींद्र दुबे
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पठानकोट में हुए ताजा आतंकी हमले ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि इन दिनों भारत की सैन्य स्थापनाएं पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के निशाने पर हैं। ताजा हमला भी रक्षा संस्थानों की जानकारियां जुटाने के आईएसआई के अभियानों के परिप्रेक्ष्य में है। यह बात तीन पाक नागरिकों और पिछले दिनों हुई कई भारतीय भेदियों की गिरफ्तारी से भी जाहिर हुई है। इन गिरफ्तारियों से भारतीय एजेंसियां आश्चर्यचकित रह गई थीं, क्योंकि जासूसों की गिरफ्तारी उनकी प्राथमिकता सूची पर सामान्यत: नहीं होती।
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गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के दौरान जाहिर हुआ कि आईएसआई भारतीय सेना के बारे में गोपनीय जानकारी हासिल करना चाहती है और इसके लिए वह किसी भी सीमा तक जा सकती है। बेशक संवेदनशील जानकारी तक इन भेदियों की पहुंच सीमित थी, पर उन्हें नामों, प्रक्रियाओं और यातायात व्यवस्थाओं की खासी जानकारी थी। ग्वालियर में भारतीय वायुसेना के टैक्टिकल ऐंड कम्बैट डिप्लायमेंट इस्टेब्लिशमेंट में घुसपैठ एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन था। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि सेना की युद्ध योजनाएं (ऑर्डर ऑफ बैटल) भी सुरक्षित नहीं रहीं।

सेना से सीमा सुरक्षा बल और सीमा सुरक्षा बल से भारतीय वायुसेना तक जिस तरह से जासूस उभर कर सामने आ रहे हैं, उससे लगता है कि आईएसआई की पहुंच सर्वव्यापी है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी ) के निर्देशन में कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और उत्तर प्रदेश के स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल सेल द्वारा की गई जांच के तहत नवंबर 2014 से आज तक देश भर से आईएसआई के 14 जासूस पकड़े गए हैं, जिनमें दो-मोहम्मद ऐजाज और मोहम्मद इलियास-पाकिस्तानी हैं। इलियास के नेतृत्व में एक मॉड्यूल आईएसआई के पाकिस्तानी और बांग्लादेशी रंगरूटों को भारत में प्रवेश दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाने की कोशिश कर रहा था। इस मॉड्यूल का नेटवर्क बहुत बड़ा था। कोलकाता का मोहम्मद इरशाद, राजौरी का राइफलमैन फरीद खान और इस्लामाबाद में जन्मे मोहम्मद ऐजाज पूर्वी, पश्चिमी व उत्तरी भारत में  सेना, नौसेना, और वायुसेना की गतिविधियों की सूचनाएं भेजते थे।
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ऐजाज एक अच्छे-खासे पाकिस्तानी परिवार से है। उसका भाई ब्रिटिश उच्चायोग में फोटोग्राफर है,फिर भी जब वह आईएसआई की ट्रेनिंग के बाद कराची से बंगलादेश के लिए रवाना हुआ, तो उसने खुद को अनाथ बताया। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स ऐंड इंजीनियर्स लिमिटेड के कर्मचारी इरशाद ने उसे गार्डन रीच और उत्तर प्रदेश के बरेली में रुकने में मदद की। उसने कोलकाता डाकयार्ड के फोटो भी खींचे थे। वह और कैफियतुल्ला उत्तर और पूर्वी भारत में आईएसआई के ऑपरेशनों का काम देखते थे।

पिछले दिसंबर में राजस्थान से भी कई जासूस गिरफ्तार किए गए। पंजाब पुलिस तो वर्ष 2013 से कई जासूसों को गिरफ्तार किया है। लगातार हो रही जासूसों की गिरफ्तारियों से साफ है कि भारत को आईएसआई के इरादों के प्रति और ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
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