मलयेशिया में एक किशोरी ने इंस्टाग्राम पर पूछा कि क्या उसे मर जाना चाहिए या नहीं। जवाब में 69 फीसदी ने कहा- हां, तो किशोरी ने अपनी जान ले ली। कहा जा रहा है कि किशोरी की मौत के पक्ष में वोट देने वालों पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोष लगाकर मुकदमा चल सकता है। पर अपने ही देश में मौत को गले लगाने वाले जेएनयू के छात्र थॉमस के बारे में दावा है कि उसने बिना किसी उकसावे के सिर्फ मौत का रहस्य जानने के लिए अपनी जान दे दी।
पुलिस ने बताया कि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पंखे से लटककर जान देने से पहले थॉमस ने अपने प्रोफेसर को ईमेल किया, जिसमें मृत्यु को साक्षात (फिजिकल फॉर्म में) देखने की इच्छा जताई गई थी। साल भर पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में परिवार के 11 लोगों की आत्महत्या के पीछे भी यह दावा किया गया था कि उन्हें लगता था कि वे मौत के रहस्य को जान लेंगे और इस दुनिया में फिर से वापस आ जाएंगे।