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इतने सारे अच्छे दिन

Wed, 13 May 2015 08:33 PM IST
राजेंद्र शर्मा
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अब सरकार के उन आलोचकों के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है, जो कल तक अच्छे दिन कहां हैं, कहां हैं, पूछकर कान खा रहे थे। अच्छे दिन बाकायदा आने लगे हैं, और वह भी सिर्फ साल भर में। अयोध्या के प्रस्तावित राम मंदिर का मामला ही ले लीजिए। मोदी सरकार का एक साल अभी पूरा भी नहीं हुआ है और मामले की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। सुर्खियों में यह मामला कोई अपने आप नहीं आ गया है। बाकायदा होम मिनिस्टर को इसके लिए अयोध्या का चक्कर लगाना पड़ा है।
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अब जब शुरुआत हो गई है, तो भव्य मंदिर का बाकायदा जमीन पर आना तय है। बस जरा लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी बेचारों को बहुमत मिल जाए। हां! दोनों सदनों में बहुमत होना जरूरी है। अब अगर पब्लिक मंदिर के लिए इतना भी करने को तैयार नहीं है या कल को राज्यसभा में बहुमत होते-होते, लोकसभा से बहुमत खींच लेती है, तो मंदिर पार्टी को कोई दोष न दे। खैर! आने की चर्चा से मंदिर के अच्छे दिन आने की शुरुआत तो हो गई है। पब्लिक ने साथ दिया, तो कुछ ही बरसों में मंदिर भी आ जाएगा।

इससे कोई यह न समझे कि सिर्फ अयोध्यावाले मंदिर के ही अच्छे दिन आने की शुरुआत हुई है। काले धन का भी तो करीब ऐसा ही किस्सा है। यह सही है कि विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस नहीं आ रहा। यह भी सही है कि हरेक देशवासी के बैंक खाते में चौदह-चौदह लाख रुपये तो क्या, चौदह पैसे भी जमा नहीं कराए जा सके हैं। वह तो सिर्फ एक चुनावी जुमला था। लेकिन बांटने के लिए पैसा भले वापस न आया हो, जमा कराने के लिए बैंक खाते तो खुल गए हैं। यही क्या कम है! काले धन के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जा रहा है, सो ऊपर से।
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यह भी कोई न भूले कि अच्छे दिन आने के इतने सारे इशारे एक साल से भी कम में आ चुके हैं। अमित शाह जी की मानें, तो उनकी पार्टी के पास इस काम के लिए अभी उनतीस साल और पड़े हैं। यह सरकार तीस साल जो चलने वाली है! सो अच्छे दिनों के लिए बहुत जल्दबाजी भी ठीक नहीं है।
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