मेहरा जी के घर पहुंचा, तो देखा कि उन्होंने ड्राइंग रूम में टमाटर सजा रखे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि जिसे हाथ लगाने से दिल घबराता हो, वह मेहरा जी के ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाए। यह तो मुझ जैसों को चुनौती देना भी हुआ।
इस जमाने में ड्रॉइंग रूम में टमाटर सजाकर रखना खतरे से खाली भी नहीं है। कोई हाथ की सफाई दिखा दे, तो भारी नुकसान हो जाए। मैंने टमाटर पर हाथ लगाते हुए पूछा, क्या ये असली हैं?
वह बोले, हैं तो असली, पर छूने के लिए नहीं।
मैंने कहा, मेहरा जी, आप तो बेकार नाराज हो रहे हैं, मैं तो बस कन्फर्म कर रहा था।
वह बिफर गए, मजाक की भी कोई हद होती है। आज के जमाने में टमाटर भी कोई छूकर देखता है!
मैंने कहा, आप तो ऐसे नाराज हो रहे हैं, जैसे मैंने छूकर इसकी सारी खुशबू ले ली हो। वैसे इस हाइब्रिड टमाटर में स्वाद नहीं होता और देसी इस सीजन में मिलता नहीं है।
मेहरा जी बोले, तभी तो तुम जैसों को दिखाने के लिए ड्राइंग रूम में रखा है। वैसे भी जिनकी पहुंच से टमाटर बाहर है, वही इन्हें स्वादहीन कहते हैं।
अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने कहा, मुझे पता है कि आप बिना सीजन के शिमला मिर्च और गोभी तक नहीं खरीदते। फिर आपने टमाटर कैसे खरीदे?
इस बार मेहरा मुस्कराए, यार, मैंने तीन ऑफर मिक्स किए और टमाटर खरीद लाया।
मैं चकराया। ऑफर में टमाटर! इस सीजन में ऑफर में आम तो मिल सकते हैं, पर टमाटर नहीं। कहीं सोने की भी सेल लगती है?
मेहरा जी बोले, काफी दिनों से क्रेडिट कार्ड वाला पीछे पड़ा था, सो मैंने तीन महीने की क्रेडिट लिमिट पर गोल्ड कार्ड बनवाया, इसके बाद कैश विड्रॉ कर डाला। फिर मैं मॉल गया, जहां दस हजार देकर बारह हजार की शॉपिंग का ऑफर था। और तीसरा आफर, मैंने बढ़ी हुई जिज्ञासा से पूछा?
यही तो बात है। मॉल ने स्कीम चला रखी थी-एक हजार की शॉपिंग पर टमाटर इंस्टॉलमेंट में। मैंने एक हजार की शॉपिंग की और ढाई सौ ग्राम टमाटर इंस्टॉलमेंट में खरीद लिए। इसका बिल मैं छह महीने में भरूंगा।
मैं मेहरा जी को बधाई देकर उठने ही वाला था कि देखा, भाभी जी आम लिए आ रही हैं। हो न हो, यह भी किसी आइटम के साथ फ्री होगा।