जिस दिन की प्रतीक्षा महीनों से थी, वह इस सप्ताह आने वाला है। इसी सप्ताह हम जान जाएंगे कि मोदी सरकार एक बार फिर बनेगी कि नहीं। यह वह समय है, जब हम राजनीतिक पंडित देश भर में घूम-घामकर वापस दिल्ली लौट आते हैं और चुनाव अभियान का फुरसत में विश्लेषण करने बैठते हैं। सो यह लिखने से पहले ऐसा मैंने भी किया।
कॉफी का प्याला अपने लैपटॉप के बगल में रखा और पिछले दो महीनों के अखबारों के संपादकीय पढ़ने लगी। यू-ट्यूब पर कामदार और नामदार (बहन-भाई) के भाषण सुने। फिर उस गठबंधन के आला नेताओं के भाषण सुने, जिसको मोदी महामिलावट कहते हैं। ऐसा करने के बाद लगा, जैसे चुनाव आयोग ने आम चुनाव को इतना लंबा घसीट कर अन्याय किया।