मैंने कश्मीर घाटी के अच्छे दिन भी देखे हैं और बुरे दिन भी। पिछले महीने मैं यह सोचकर श्रीनगर गई कि बुरे दिनों का दौर देखने को मिलेगा। ऐसा इसलिए कि दिल्ली में विशेषज्ञ पिछले तीन साल से यह प्रचार करते फिर रहे हैं कि इतना बुरा समय कश्मीर घाटी में पहले कभी नहीं रहा। बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से मैं कश्मीर नहीं गई थी, क्योंकि उसने अपने हर वीडियो में स्पष्ट किया था कि उसका ‘जेहाद’ आजादी के लिए नहीं, कश्मीर घाटी में शरीयत लाने के लिए है।
मौत के बाद बुरहान वानी कश्मीर में इतना बड़ा हीरो बन गया था कि मुझे यकीन हो गया था कि घाटी में अब कट्टरपंथी इस्लाम का बोलबाला कायम हो गया होगा। मैं उन जगहों में जाना पसंद नहीं करती, जहां जेहादी इस्लाम की तानाशाही कायम हो गई होती है।