हाल ही में विख्यात प्रॉक्सी फर्म स्टेक होल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विसेज (एसईएस) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश के ईमानदार करदाता अनुभव कर रहे हैं कि नोटबंदी से उनके साथ इंसाफ हुआ है। दशकों से उनके मन में यह भावना थी कि कर देने से उनकी कमाई कम हो जाती है, जबकि कर चोरी करने वालों की क्रय शक्ति बढ़ जाती है और वे तुलनात्मक रूप से अधिक आराम व शान से रहते हैं। नोटबंदी से वित्तीय क्षेत्र में आने वाली किफायत से अर्थव्यवस्था को भारी लाभ होगा। कालेधन और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के इस कदम के बाद आम आदमी के लिए नकदी उपलब्ध कराने के साथ ही अवैध धन संग्रह पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।
देश के उद्योग-कारोबार में बड़ी नकदी के लेन-देन पर अंकुश भी लगाया जाना चाहिए। कालेधन की जांच से जुड़ी समिति के अध्यक्ष जस्टिस एम. बी. शाह ने अपनी सिफारिशों में तीन लाख रुपये से अधिक के नकद लेन-देन पर रोक लगाने की बात कही है। लेकिन पांच लाख रुपये से अधिक के नकद लेन-देन को रोका जाना उपयुक्त होगा। नकदी रखने की अधिकतम सीमा भी पंद्रह लाख रुपए की जानी चाहिए। इससे अधिक का लेन-देन बैंक चेक, ट्रेवल्स चेक, डिमांड ड्राफ्ट या अन्य तरीकों से किया जाना उपयुक्त होगा। आयकरदाताओं का दायरा बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। देश में अभी कोई साढ़े तीन करोड़ लोग आयकर अदा करते हैं। बड़े नोट बंद किए जाने के बाद पचास लाख से एक करोड़ नए आयकरदाता बढ़ाए जा सकते हैं। ज्यादा लोगों को आयकर दायरे में लाने के लिए वर्ष 2017-18 के नए बजट में कर छूट 2.50 लाख से बढ़ाकर साढ़े तीन लाख रुपये की जानी चाहिए। सरकार द्वारा नॉन फाइलर्स मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये आयकर चूककर्ताओं के रूप में जिनकी पहचान की गई है, उनसे पूछताछ की जानी चाहिए। कालेधन की समस्या के समाधान के लिए टैक्स दरों में कटौती और सरकारी कर्मचारियों और नेताओं के भ्रष्टाचार पर नकेल कसना भी जरूरी है। अब देश में वित्तीय बचतों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। चूंकि कालेधन में कमी आने से सोना और अचल संपत्ति में निवेश कम होगा, इसलिए बचतों की संभावना बढ़ेगी।
चूंकि पांच सौ और हजार रुपये मूल्य वाले पुराने प्रचलित नोट बंद करना कालेधन पर एक बड़ी चोट है। ऐसे में प्लास्टिक मनी को प्रोत्साहन देना जरूरी है। देश में अभी केवल 13 लाख पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल हैं, जहां डेबिट-क्रेडिट कार्ड के उपयोग हो पाते हैं। इस बुनियादी ढांचे को कई गुना बढ़ाना होगा। मार्च 2016 तक भारत में करीब 66 करोड़ डेबिट कार्ड चलन में थे, लेकिन इनमें से 90 फीसदी डेबिट कार्ड का इस्तेमाल एटीएम से केवल नकद निकासी के लिए ही हो रहा है। क्रेडिट कार्ड केवल 2.3 करोड़ ही हैं। ऐसे में डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बारे में जागरूकता अभियान चलाकर इन्हें लोकप्रिय बनाना जरूरी है। भूमि और संपत्ति के ब्यौरे का डिजिटलीकरण भी अनिवार्य होना चाहिए। इसे पैन और आधार संख्या से जोड़ा जाए। जोत के आधार पर छोटे किसानों को मुक्त रखते हुए कृषि आय पर कर लगाया जाए। छोटे किसानों को साहूकारों से अधिक ब्याज पर लिए गए कर्ज वापस करने के लिए एक मुश्त सरल कर्ज दिया जाए। सबसे अहम यह है कि कालेधन के सृजन को खत्म करने के लिए चुनावों में उसके प्रयोग को सख्ती से रोकना होगा। यद्यपि पिछले कुछ वर्षों में चुनावों में धन को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें और सतर्कतता जरूरी है।