कोविड-19 के इन दुर्दिनों में कोई भी अपनी सरकार पर भरोसा नहीं करता। न्यूजीलैंड बेशक इसका अपवाद हो सकता है, जहां के प्रधानमंत्री ने शानदार नेतृत्व दिखाया और अपने देश को खतरे से बाहर निकाला। इस हफ्ते पाकिस्तान में 2,50,000 से अधिक पुष्ट मामले सामने आए, जबकि लगभग साढ़े पांच हजार मौतें दर्ज की गई हैं।
पाकिस्तानियों को तब थोड़ा संदेह हुआ, जब सरकार ने कहा कि महामारी का चरम जून में था और कोरोना का वक्र अब धीरे-धीरे समतल हो रहा है। पर इस बात की सख्त चेतावनी दी गई है कि जुलाई के अंत में ईद के समय कुर्बानी के लिए पशु खरीदने, खरीदारी आदि जैसी अतिरिक्त गतिविधियों से वायरस का सामुदायिक प्रसार हो सकता है। रमजान के अंत में पिछली ईद के दौरान भी यही हुआ था। तब पॉजिटिव पाई जाने वाली महिलाओं में से ज्यादातर ऐसी थीं, जो बगैर मास्क और बिना सोशल डिस्टेंसिंग के खरीदारी कर रही थीं।
विपक्षी दलों ने सरकार पर पॉजिटिव मामलों की सही सूचना न देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि खासकर पंजाब में जांच में कमी आई है। जब जांच धीमी हो गई है, तब स्वाभाविक है कि पॉजिटिव मामले सामने नहीं आएंगे। एक समय जब सरकार लापरवाह थी, तब कई देशों ने पाकिस्तान से आने वाले विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया था, क्योंकि अनेक यात्री बीमार और वायरस से संक्रमित थे। हाल में कई यात्रियों ने शिकायत की कि हवाई अड्डों पर किसी तरह की जांच प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता।
न तो यात्रियों का तापमान मापा जाता है और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जाता है। कई मुसाफिर, जो वायरस के वाहक होते हैं, सीधे अपने घर जाते हैं और अपने परिवार के लोगों व दोस्तों में संक्रमण फैलाते हैं। इस बात से शायद सभी सहमत हैं कि पूरे मुल्क या पूरे शहर को बंद करने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, जिससे बेरोजगारी बढ़ती है। भले ही अनेक नागरिकों के लिए यह मुश्किल वक्त है, पर सौभाग्य से पाकिस्तान में किसी की भूख से मौत नहीं हुई है।
स्मार्ट लॉकडाउन के तहत, जैसा कि प्रधानमंत्री इमरान खान कहते हैं, अब ऐसे क्षेत्रों को बंद किया जाता है, जहां पॉजिटिव मामलों की संख्या बहुत ज्यादा है। इसलिए शहरों की कुछ गलियों और सेक्टरों को सुरक्षा बलों और चिकित्साकर्मियों की निगरानी में बंद कर दिया गया है और उसे शेष इलाकों से अलग रखने के लिए तारों और बैरिकेड से घेर दिया गया है। ऐसी जगहों पर केवल एक व्यक्ति ही खाद्य पदार्थों या दवाओं और सरकारी व निजी क्षेत्र की जरूरी वस्तुओं व सुविधाओं के लिए बाहर निकल सकता है।
सरकारी दुकानों के ट्रक खाने-पीने की चीजों के साथ इलाके में जाते हैं और लोग वहां से खरीदारी कर सकते हैं। पर बहुतेरे लोगों का कहना है कि स्मार्ट लॉकडाउन काम नहीं कर रहा। एक व्यक्ति की राय कुछ इस तरह थी- स्मार्ट लॉकडाउन एक तमाशा है। खुद जाकर देख लीजिए। किसी इलाके के एक हिस्से को बंद करके रखा गया है, लेकिन वहां के लोगों को घर में रखने की कोई कोशिश नहीं की गई है। वे यों ही भटक रहे हैं और अपना कारोबार कर रहे हैं।
इसका फायदा सिर्फ स्थानीय पुलिस उठा रही है, जो अपनी मर्जी से लोगों को रोक लेती है और घूस लेकर जाने देती है। मॉल, रेस्टोरेंट, जिम, ब्यूटी पार्लर और सैलून अब भी बंद हैं, पर सरकार ने एलान किया है कि सितंबर में स्कूल फिर से खुलेंगे। मार्च से ही स्कूल बंद हैं और कुछ सुविधा संपन्न छात्र ही इंटरनेट के जरिये क्लास कर रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि यदि सितंबर तक वायरस का संक्रमण बढ़ता है, तो शिक्षण संस्थान बंद ही रहेंगे।
महामारी के पहले से ही अर्थव्यवस्था की खराब हालत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह संकट खासकर निर्यात के मोर्चे पर बदलाव लेकर आया है। व्यावसायिक घराने और निर्माता उत्पाद बना रहे हैं और निर्यात बढ़ रहा है। मास्क लगाना न सिर्फ अनिवार्य है, बल्कि डिजाइनर मास्क का चलन बढ़ रहा है। कई मशहूर ब्रांड अब मास्क तैयार कर रहे हैं और फैशनेबल महिलाएं अपने परिधान से मेल खाते कढ़ाई वाले और विभिन्न रंगों के कपड़ों के मास्क पहन रही हैं। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी को खास अजरक कपड़े से बने मास्क में देखे जाने पर हलचल पैदा हुई। सिंध इस कपड़े के लिए मशहूर है।
सेना ने एक विश्वविद्यालय के साथ मिलाकर हैंड सैनिटाइजर बनाना शुरू किया है। पहले पाकिस्तान में इसका आयात किया जाता था, अब इसका निर्यात किया जा रहा है। चूंकि कामगारों की गैर मौजूदगी के कारण कारखाने बंद हैं और दुकानों के बंद होने के चलते कपड़ों की मांग घट गई है, ऐसे में वस्त्र उत्पादकों ने अब घरेलू इस्तेमाल और निर्यात के लिए पीपीई सूट तैयार करना शुरू कर दिया है। अलबत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्थानीय निर्माताओं द्वारा तैयार किए जा रहे वेंटिलेटर सबसे सफल हैं। जब महामारी शुरू हुई थी, तब पाकिस्तान चीन एवं अमेरिका जैसे मित्र देशों पर वेंटिलेटर के लिए निर्भर था, जिन्होंने हजारों वेंटिलेटर दान में दिए। हालांकि अस्पतालों में वेंटिलेटरों की मांग अब भी अधिक है।
हैरानी की बात यह है कि पढ़े-लिखे लोगों सहित अनेक पाकिस्तानी ऐसे हैं, जो महामारी की गंभीरता को ही नहीं समझते। वे मास्क पहनने से इन्कार करते हैं, सोशल डिस्टेंसिंग में यकीन नहीं करते और सरकार का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं कि प्रधानमंत्री विदेश से धन इकट्ठा करने के लिए महामारी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
लेकिन हर कोई जानता है कि खतरा अभी टला नहीं है। पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. शाहिद मलिक कहते हैं कि बेशक बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षण क्षमता विकसित कर ली है और उनमें कोई लक्षण भी नहीं दिखते, लेकिन वायरस के दूसरे चरण के संक्रमण का उन पर खतरा है, क्योंकि वायरस में रूपांतरण की प्रवृत्ति होती है। जाहिर है, सरकार पर महामारी से निपटने और उस पर काबू पाने के लिए और कदम उठाने का दबाव बना हुआ है।