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मुद्दा: आगामी चुनाव में मुद्दों का सवाल, अगले साल के लिए इसी वर्ष शुरू होगी उलटी गिनती

Wed, 03 Jun 2026 08:23 AM IST
Pavan बद्री नारायण

सार

उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में असल मुद्दे क्या होंगे, इस पर कुछ माह बाद कयास लगना शुरू होगा, पर इतना तो साफ है कि चुनाव मुद्दों के भीतर मुद्दों का होगा।
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आगामी चुनाव में मुद्दों का सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में अगले साल विधान सभा चुनाव होने हैं। यहां धीरे-धीरे चुनाव का माहौल बनने लगा है। सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए शुरू हुआ संग्राम, रामायण की पुनर्व्याख्या और सनातन की सनातनता पर विमर्श इसी का प्रतीक है। आगामी चुनाव में असल मुद्दे क्या होंगे, इस पर कुछ माह बाद कयास लगना शुरू होगा, पर इतना तो अभी से साफ है कि आगामी चुनाव ‘मुद्दों के भीतर मुद्दों’ का चुनाव होगा। छोटे-छोटे मुद्दे और लोगों की अलग-अलग अपेक्षाएं चुनाव में जरूर दिखाई देंगी, किंतु चुनाव का महावृत्तांत हिंदुत्व और विकास के इर्द-गिर्द विकसित होगा। वास्तव में, ये दोनों महज चुनावी मुद्दे नहीं हैं, बल्कि पिछले दो दशकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों से उभरे हुए सतत विमर्श हैं। चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो, उसे इन मुद्दों का सामना करना ही होगा और इन मुद्दों पर अपनी सोच व दृष्टिकोण जनता के सामने खुलकर रखनी पड़ेगी।
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योगी आदित्यनाथ ने अपनी राजनीति, भाषणों और कार्यशैली में तुष्टीकरण की राजनीति के विरोध को प्रमुख स्थान दिया है। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों के धार्मिक उपयोग पर नियंत्रण, कुछ मंदिरों से जुड़े ऐतिहासिक विवादों और उनसे जुड़ी स्मृतियों को सामने लाने, तथा बुलडोजर नीति जैसे मुद्दों को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री के विकास एजेंडे को भी जमीन पर लागू करने का प्रयास किया और उसे प्राथमिकता दी। अतः किसी भी पार्टी को अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा से टकराना है, तो उसे इन महावृत्तांतों के विमर्श की जद में शामिल होना ही होगा।

 प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में की गई विकसित भारत की परिकल्पना के तहत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास के कई महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किए हैं। पिछले साल महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय जीडीपी में सर्वाधिक योगदान दर्ज किया गया। सरकार ने अपनी विकास की गति को गरीबों, युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित रखा है। गरीबों को केंद्र में रखते हुए सामाजिक सुरक्षा व कल्याण की योजनाओं के लिए आवंटित बजट में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस क्षेत्र के लिए वर्ष 2017-18 में 18,674 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, जो बढ़कर 2025-26 में 34,504 करोड़ रुपये हो गया है। इस वृृद्धि का असर जमीनी स्तर पर गरीब समूहों की विकासपरक गतिशीलता में दिखाई पड़ेगा।
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गरीबों, महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही स्टैंड-अप इंडिया योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में बना हुआ है। घर मुहैया कराने का अभियान भी राज्य में तेज हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 30.69 लाख घरों के अलावा, वर्ष 2018 के बाद मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 3.65 लाख घर समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों को दिए गए हैं। इन योजनाओं ने न केवल गरीब परिवारों को रहने के लिए पक्की छत उपलब्ध कराई है, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का एहसास भी कराया है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं इसी दशक में पूरी हुई हैं। इससे विकास, गतिशीलता और निर्यात को गति मिली है, जो किसी भी राज्य के आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।

दूसरा, उत्तर प्रदेश ने अपने उत्पादों को तो बढ़ाया ही है, उनके निर्यात में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश भारतीय निर्यात में योगदान देने वाले राज्यों में पांचवां राज्य बनकर उभरा है। इस अवधि में राज्य के निर्यात में करीब 76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। केंद्र की योजनाओं का बेहतर संचालन व राज्य की संपूरक विकास परियोजनाओं के संयुक्त प्रभाव के रूप में राज्य लगातार विकास का ढांचागत और मानवीय इंफ्रास्ट्रक्चर रचता जा रहा है। कृषि, सिंचाई, नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में राज्य सरकार ने कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इन योजनाओं का जमीनी असर राजनीति में भी दिखेगा। विपक्ष इसे समझता है, इसलिए कांग्रेस व समाजवादी पार्टी विकास के मुद्दे पर सरकार को घेर रही हैं। वहीं, राज्य में विकास का विमर्श कहीं न कहीं हिंदुत्व की भावना से भी जुड़ गया है। ऐसे में, साफ लगता है कि आगामी विधान सभा चुनाव में विकास और हिंदुत्व महावृत्तांत के रूप में उभरेंगे। पक्ष और विपक्ष, दोनों को ही इन दो बड़े विमर्शपरक वृत्त में रहकर अपने विमर्श की रणनीति तैयार करनी होगी।  - edit@amarujala.com
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