रूस के शहर व्लादिवोस्तोक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को लेकर जो सहमति बनी है, वह महत्वपूर्ण है। रूस और भारत के रिश्ते बहुत पुराने रहे हैं। एक ऐसा भी जमाना था, जब हमारे करीब 70 फीसदी रक्षा उपकरण रूस से ही आते थे। इसके अलावा ऊर्जा के क्षेत्र में भी हमारा रिश्ता बहुत बढ़िया था। जब कभी हमें डीजल या ऊर्जा के अन्य क्षेत्रों में जरूरत महसूस हुई, तो रूस हमेशा हमारी मदद करने आगे आया। खासकर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में रूस के साथ हमारा बहुत अच्छा कार्यक्रम चलता रहा है। रूस में हमने अपना निवेश बढ़ाया है, जो करीब दस अरब डॉलर का हो गया है। रूस ने भी हमारे यहां करीब बारह अरब डॉलर का निवेश किया है।
रक्षा क्षेत्र या ऊर्जा के क्षेत्र में तो निवेश ठीक-ठाक हुआ, लेकिन बाकी क्षेत्रों में बात बहुत आगे बढ़ नहीं पाई, खासकर जबसे रूस ने रुपये और रूबल की पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया और कहा कि अब सौदे फ्री फॉरेन करेंसी में होंगे। भारत ने भी रक्षा सौदों में ऑफसेट और प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाने की जरूरत का मुद्दा उठाया, तो हमने देखा कि धीरे-धीरे रक्षा सौदों में रूस के साथ हमारी खरीदारी घट गई। ऑफसेट का मतलब होता है कि किसी देश के साथ हमने जितने का सौदा किया, उसका पचास फीसदी निवेश वह देश भारत में करेगा।