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तालिबान: काबुल में पाबंदियों के दो साल, मानवीय आधार पर हल निकालने की दरकार

कुलदीप तलवार
Updated Sat, 30 Sep 2023 07:22 AM IST

सार

जरूरत इस बात की है कि मानवीय आधार पर अफगानिस्तान को विश्व समुदाय से मदद मिले और अफगान समस्या का मजबूत हल निकले।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Agency (File Photo)


साल 2021 में सत्ता हासिल करने के बाद तालिबान विश्व बिरादरी से अलग-थलग हो गए हैं। उन्होंने महिलाओं और लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं। स्कूल-कॉलेजों में उनके लिए दरवाजे बंद करने के बाद तालिबान ने पूरे मुल्क में करीब 15 हजार ब्यूटी सैलूनों पर ताला लगा दिया है, जिससे लगभग 60 हजार महिलाएं और लड़कियां बेरोजगार हो गई हैं। ये महिलाएं अपने बच्चों के साथ सड़कों पर उतरकर सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। लेकिन तालिबान उनकी मांगें पूरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।


पुरुषों को भी तंग व पतले कपड़े पहनने से रोका जा रहा है। तालिबान के मुताबिक, ऐसे कपड़े पहनना अफगान संस्कृति के खिलाफ है। संगीत पर भी रोक लगा दी गई है। खुशी के मौके पर अब वहां किसी तरह का वाद्य यंत्र नहीं बजाया जा सकता। इससे अवाम में गुस्सा पनप रहा है।


अफगानिस्तान में खुलेआम सजा देने की व्यवस्था भी फिर से शुरू कर दी गई है, ताकि अवाम अपनी आंखों से देख सके कि अपराध करने पर कैसी सजा दी जाती है, नतीजतन लोग जुर्म करने से डरें। लेकिन इससे विश्व बिरादरी में गम और गुस्सा है। तालिबान सरकार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय सहायता देने वाली संस्था रेडक्रॉस द्वारा अफगानिस्तान में चलाए जा रहे 25 अस्पतालों को बंद कर दिया है। इससे अफगान नागरिकों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है।


इस बीच चीन ने काबुल में अपना राजदूत नियुक्त कर दिया है और वह इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन के अफगानिस्तान में व्यापारिक और राजनीतिक हित जुड़े हुए हैं। उसकी नजर अफगानिस्तान के खरबों रुपये के मूल्य की खनिज संपदा पर है। लेकिन चीन द्वारा अपने राजदूत नियुक्त करने को किसी भी सूरत में मान्यता देना नहीं कहा जा सकता।


चिंता की बात यह है कि अफगानिस्तान विदेशी आतंकवादियों की पनाहगाह बन गया है। आईएस और अलकायदा के लड़ाके वहां सक्रिय हैं। यही कारण है कि तालिबान सरकार पूरे देश पर नियंत्रण नहीं कर पा रही। तालिबान में भी कई धड़े बन गए हैं। पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के रिश्ते भी काफी खराब हो गए हैं। एक-दूसरे को भाई कहने वाले ये देश अब एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलने लगे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि जो हमले तहरीक-ए-तालिबान पाक (टीटीपी) कर रहा है, उनको अफगानिस्तान तालिबान मदद कर रहे हैं, जबकि पड़ोसी देश भारत मानवीय आधार पर अफगानियों को मदद दे रहा है। पिछले दिनों भारत ने ईरान के रास्ते 20 हजार टन और अब पाक के रास्ते 10 हजार टन अनाज भेजा है।


भारत अफगानिस्तान में अमन चाहता है। अफगान जनरल मोबीन ने पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान एक साथ ही आजाद हुए थे, लेकिन दोनों देशों की तरक्की में भारी अंतर है। भारत जहां चांद पर पहुंच गया है, वहीं पाकिस्तान की हालत खराब है और उसे आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि भारत चांद के नीचे तिरपाल फैला दे, तो क्या पाकिस्तान ईद नहीं मनाएगा। यानी अफगानिस्तान सरकार को पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधार की दिशा में काम करने होंगे।
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संयुक्त राष्ट्र भी अफगानिस्तान के भयानक हालत पर नजर रखे हुए है। जरूरत इस बात की है कि मानवीय आधार पर अफगानिस्तान को विश्व समुदाय से ज्यादा से ज्यादा सहायता मिले और अफगान समस्या का कोई मजबूत हल निकले। देखना यह है कि आने वाले दिनों में अफगानिस्तान के हालात क्या शक्ल अख्तियार करते हैं।
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