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सुराज, रामराज, अध्यादेश राज

Wed, 14 Jan 2015 07:42 PM IST
सहीराम
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जी नहीं, हम उस राज की बात नहीं कर रहे, जो अक्सर लोगों के दिलों में दफन रहता है। हम उस राज की बात नहीं करते, जिसके बारे में वायदा किया जाता है कि यह मेरे साथ ही दफन हो जाएगा या जिसे लेकर कई बार धमकी दी जाती है कि राज की बात कह दूं, तो जाने महफिल में फिर क्या हो। हम उस फिल्मी हीरो की भी बात नहीं कर रहे, जिसका नाम अक्सर राज होता है, और जिससे फिल्म के हिट होने की उम्मीद बनी रहती है। हम तो उस राज की बात कर रहे हैं, जिसे शासन कहा जाता है। यह राज तरह-तरह का होता है।
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जैसे, बिहार में एक जमाने में जंगल राज बड़ा फेमस था। फिर वहां सुराज आ गया। जिन पर जंगल राज चलाने का आरोप था, वे और जो सुराज या सुशासन के लिए छाती ठोंकते थे, उनका इन दिनों आपस में मिलन हो रहा है। जो सुशासन वालों से अलग रहकर खुद के सुराजी होने का दावा करते हैं, वे इस मिलन को भरत मिलाप टाइप का बताकर फब्तियां कस रहे हैं। पर हम तो न जंगल राज की बात कर रहे हैं, न ही सुराज की। इसीलिए तो हम कह रहे हैं कि राज कई तरह के होते हैं।

अब राज तो तानाशाही राज भी होता है और रामराज भी। रामराज को तो लोगों ने फिर भी रामराज कहा, पर तानाशाही राज को कभी रावण राज नहीं कहा। तानाशाही राज कायम करने का दावा कोई नहीं करता और रामराज लाने का वायदा हर कोई करता है। लेकिन गुणगान करनेवाले तानाशाही राज को रामराज का दर्जा दिलवा देते हैं और रामराज लाने का दावा करनेवाले तानाशाही राज कायम करने लगते हैं।
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एक जमाने में लाइसेंस राज भी होता था, इंस्पेक्टर राज भी होता था। कहते हैं, नव-उदारवाद ने लाइसेंस राज और इंस्पेक्टर राज को खत्म करने का ऐसा वायदा किया कि वह खूब फला-फूला। पर हम न लाइसेंस राज की बात कर रहे हैं और न ही इंस्पेक्टर राज की। हम बात कर रहे हैं अध्यादेश राज की, जो नया-नया आया है। बताते हैं कि यह नई सरकार के साथ आया है और इधर खूब अपना जलवा दिखा रहा है।
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