गृहिणी का सम्मान: सुप्रीम कोर्ट का फैसला रूढ़िवादी सोच पर एक कड़ा प्रहार
अमर उजाला
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 13 Jun 2026 06:06 AM IST
सार
विभिन्न अध्ययनों व सर्वेक्षणों से यह तथ्य सामने आ चुका है कि आमतौर पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक समय घरेलू देखरेख में लगाती हैं। इसके बावजूद, राष्ट्रीय आय और उत्पादकता के पारंपरिक पैमानों में उनके योगदान का समुचित प्रतिबिंब नहीं दिखाई देता। जाहिर है कि यह स्थिति न केवल आर्थिक असमानता को बढ़ाने वाली है, बल्कि महिलाओं की भूमिका के सामाजिक अवमूल्यन को भी जन्म देती है।
सुप्रीम कोर्ट
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