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दाग अच्छे हैं

Wed, 12 Nov 2014 08:07 PM IST
राजेंद्र शर्मा
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यह दूसरे का शगुन बिगाड़ने के लिए अपनी नाक कटवाना नहीं, तो और क्या है? नरेंद्र भाई की सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार का मजा बिगाड़ने के लिए 'दाग-दाग' का शोर मचाने वालों को और क्या कहा जाए? वे जमाने लद गए, जब दाग छिपाने पड़ते थे। संत भी हैरान-परेशान फिरते थे कि लागा चुनरी में दाग, छुपाऊं कैसे? पर अब नहीं। अब दाग का मतलब हमेशा बुरा ही नहीं होता।
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बल्कि नए जमाने में दाग ज्यादातर अच्छा ही करते हैं और माथे पर टीके की तरह सजाए जाते हैं। वरना दाग छिपाने के लिए मेकअप से लेकर मेक ओवर तक-आज के जमाने में किस चीज की कमी है? पर नासमझ लोग हैं कि खुद पिछड़े बने रहने के लिए तैयार हैं। दाग के चक्कर में नए मंत्रियों को देखकर दागी-दागी चिल्ला रहे हैं। इन्होंने तो बाकायदा लिस्ट तैयार कर दी है कि इक्कीस नए में से आठ दागी हैं, स्वच्छता के वायदे का क्या होगा! वे तो सुबूत भी देने को तैयार हैं। उनकी मानें, तो मंत्री बन चुके एक शख्स ने पहले कहा था कि जो मोदी से नहीं करते प्यार, सीमा पार जाने को हो जाएं तैयार। नए-नए मंत्री बने दो लोगों ने एक समुदाय को जगाया था कि उठो और दूसरों का मुकाबला करो। एक और के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने बैंक से कुछ सौ करोड़ रुपये लिया था और अपना मानकर रख लिया था।

बेचारी सरकार सफाई दे-देकर परेशान है कि ये दाग नहीं हैं, पिछली सरकार वाले दाग तो हर्गिज नहीं हैं। अगर ये दागी होते, तो अपने हलफनामों में इन्होंने दाग नहीं गिनाए होते? पर लोग हैं कि दूध से जलने के बाद छाछ भी फूंक-फूंककर पीना चाहते हैं। सारे दागों को एक ही डंडे से हांकने पर तुले हुए हैं। यह कोई तर्क नहीं कि अगर पिछली सरकार वालों के दाग कालिख लगाने वाले थे, तो इस बार के चेहरा चमकाने वाले कैसे? इन्हें कोई तो वाशिंग पाउडर का विज्ञापन दिखाए और इसका एहसास कराए कि दाग सिर्फ अपने और पराये ही नहीं होते। दाग अच्छे भी होते हैं। इस बार वाले दाग अच्छे हैं। प्लीज, मान भी जाइए।
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