हाल ही में भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में 62 फीसदी सीईओ ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बीच भी मांग बढ़ने से 2020 में आर्थिक परिदृश्य पिछले साल से बेहतर होगा। क्रिसिल ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि यह साल कृषि समेत भारतीय अर्थव्यवस्था के छह क्षेत्रों की रफ्तार बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है, जिस कारण इसकी आर्थिक विकास दर अमेरिका और ब्रिटेन सहित विकसित देशों से अधिक रहते हुए छह फीसदी से अधिक हो सकती है। कोटक सिक्युरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में सेंसेक्स 45,000 के पार होते हुए दिखेगा।
अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए सरकार ने बीते साल जो कई कदम उठाए, अब उनका लाभ मिल सकता है। वर्ष 2019 में महंगाई नियंत्रित रही और इस साल भी यह सिलसिला जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बीच भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 455 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में बढ़ोतरी जारी रहने की संभावना है। इस साल भी विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय शेयर बाजार के सबसे पसंदीदा गंतव्य देश बने रहने की उम्मीद है। बीते साल सेंसेक्स ने 15 फीसदी रिटर्न दिया, जिसके इस साल भी बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि कंपनी कर में कटौती के अलावा दिवालिया कानून तथा जीएसटी में सुधार किए गए तथा बैंकिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने फंड उपलब्ध कराए हैं। अब देश में 125 करोड़ लोगों के पास आधार है तथा सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों को आधार के साथ बैंक खातों के माध्यम से लाभ दिया जा रहा है, अतएव भ्रष्टाचार में और कमी आएगी।
चूंकि वैश्विक सुस्ती के साथ कच्चे तेल के मूल्य बढ़ने की आशंका इस साल बनी रहेगी, इसलिए सरकार को रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ना होगा। निर्यात मौकों को भुनाने के लिए नई नीति के साथ आगे बढ़ना होगा। सरकार को श्रम संहिताओं को लागू करना होगा तथा मैन्यूफेक्चरिंग, बैंकिंग, कॉरपोरेट, ई-कॉमर्स, ग्रामीण विकास, भूमि एवं काले धन पर नियंत्रण से लेकर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी और कठोर कदम उठाने होंगे। बैंकों की बैलेंस शीट में व्याप्त गड़बड़ियां दूर करने, सरकारी बैंकों का संचालन सुधारने तथा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की निगरानी बेहतर करना भी जरूरी है।
नए साल में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की अधूरी योजनाओं को पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जीएसटी परिषद द्वारा करदाता शिकायत निवारण व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। नीति आयोग द्वारा जीएसटी की सिर्फ दो दरें रखे जाने की सिफारिश की गई है। यदि इसके दो या तीन स्लैब रखे गए, तो कारोबार बढ़ेगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम को नरम करने, अनुबंध खेती को बढ़ावा देने, बेहतर मूल्य के लिए वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देने, कृषि उपज की नीलामी के लिए न्यूनतम आरक्षित मूल्य लागू करने, शीतगृहों के निर्माण में वित्तीय सहायता देने जैसे कामों को आगे बढ़ाए जाने से कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। वर्ष 2020 को आर्थिक एवं वित्तीय दृष्टिकोण से बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन अधिनियम की समीक्षा समिति की अनुशंसाओं का ध्यान रखा जाए।