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...ताकि नारी शक्ति को मिले सुरक्षित माहौल

लक्ष्मी सिंह Published by: Amit Mandal Updated Fri, 23 Oct 2020 05:40 AM IST
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Navratri - फोटो : अमर उजाला

वर्षा के उपरांत स्वच्छ हुई धरा पर हृदय में सुमंगल की कामना धारण करने वाली नवदुर्गा के आह्वान का समय होता है शारदीय नवरात्र। या देवि सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता का उद्घोष सर्वत्र छाया रहता है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन 17 अक्तूबर से उत्तर प्रदेश सरकार ने मिशन शक्ति योजना प्रारंभ की, जिसके माध्यम से 24 विभागों द्वारा प्रतिपादित जनकल्याण योजनाओं को 59,000 ग्राम पंचायतों, 630 शहरी निकायों, 1,535 थानों और 822 ब्लाकों के जरिये 75 जनपदों के 24 करोड़ जन तक पहुंचाने की मंगलकामना है।



सवाल उठता है कि क्या यह मिशन शक्ति योजना महज एक सरकारी आयोजन है। क्या इतने वृहद रूप में आकार लेती यह कार्य योजना धरातल पर सहजता से अपना लक्ष्य हासिल कर पाएगी? इसे समझने के लिए हमें इसके निहितार्थ में जाना पड़ेगा। हम हर वर्ष नवरात्रि में मां दुर्गा का आह्वान करते हैं। अपने घर-प्रांगण में देवी को स्थापित कर यह मानते हैं कि मां अपने नौ रूपों में घर-घर विराजी हैं। फिर जलधारा में शक्ति के रूप का विसर्जन कर पूजा को विश्राम देते हैं, इस आस्था के साथ कि देवी की शक्ति विश्वकल्याण हेतु प्रकृति में समाहित है। 


केवल स्थूल रूप का विसर्जन होता है। प्रकृति में समाहित इसी शक्ति के विभिन्न रूपों को पहचान कर उन्हें सम्मान देना इस मिशन शक्ति का उद्देश्य है। गांव-गांव में मौजूद मातृ-शक्ति को एक सुरक्षित वातावरण देना, उनके भीतर आत्मविश्वास जगाना और समाज में उनके योगदान को पहचान देना ही इसकी सार्थकता है। नारी शक्ति जब स्वाबलंबन की डगर पर चलकर विभिन्न कुटीर उद्योग, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करती है, तो वह अन्नपूर्णा कहलाती है। सूक्ष्म, लघु व मध्यम उपक्रम विभाग, उद्योग बंधु तथा समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं द्वारा इसी नारी शक्ति को प्रत्येक जनपद में सशक्त बनाया जाएगा। हमारी बालिकाएं शिक्षा विभाग की परियोजना द्वारा इस अभियान में शारीरिक तथा मानसिक रूप से पूर्णत: जागृत और आत्मविश्वास से ओतप्रोत होकर सामने आएंगी। इस अभियान में उन्हें मानसिक दृढ़ता का भी बोध कराया जाएगा। बालकों में संस्कार की पौध उगाकर उन्हें भविष्य का जिम्मेदार नागरिक बनाने के अनेक कार्यक्रम रखे गए हैं। घर से निकल कर कार्यालय तक पहुंचने की जद्दोजहद में डूबी आज की नारी इस अभियान का अहम हिस्सा हैं। स्मार्ट सिटी-सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत सरकार उन्हें एक सुरक्षित परिवेश देने के लिए कटिबद्ध है।


स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत (डॉक्टर, नर्स, आया, आदि) महिलाएं हों या फिर वकील, इंजीनियर एवं उद्यमी महिलाएं हों, सबमें मिशन शक्ति द्वारा एक नई जागरूकता लाने का प्रयास किया गया है। यह जागरूकता उन्हें उनका अधिकार बताती है, उनको कानून प्रदत्त संरक्षण की पहचान कराती है, स्वाभिमान से जीने का हौसला देती है। इस अभियान में पुलिस गांव-गांव पहुंच कर एक तरफ जहां महिलाओं से सीधा संवाद करती है, वहीं आपराधिक तत्वों पर कड़ा प्रहार भी करती है। एक अभिनव प्रयोग के जरिये उन्हें चिह्नित कर उनकी काउंसिलिंग कराई जा रही है, उनके परिवार जन से शपथ पत्र भरवाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पुलिस ग्रामीण क्षेत्र की हरेक बालिका और महिलाओं में सुरक्षा का एहसास कराती है। पुलिस की गाड़ियां ज्यादातर शहरी इलाकों तक सिमटी रहती हैं, लेकिन इस बार उनसे दूरस्थ ग्रामीण इलाके भी वंचित नहीं रहेंगे। सुरक्षा का संकल्प लिए गांव-नगर में घूमती पिंक पेट्रोल और शक्ति मोबाइल द्वारा महिला शक्ति को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।


एक सभ्य समाज की मुर्मूष प्राणधारा में नव चेतना का संचार ही मिशन शक्ति है। प्रशासन-पुलिस और जनता के समागम को नारी सुरक्षा एवं सम्मान से जोड़ना ही मिशन शक्ति है। संस्कार की पौध तैयार करना ही मिशन शक्ति है। इस नवरात्रि शक्ति का विसर्जन न होने दें। भौतिकता की पराकाष्ठा को छूते समाज में दायित्व का निर्धारण करें। सबको मिलकर एक सभ्य, सुसंस्कृत समाज का निर्माण करना चाहिए। शक्ति का तेज प्रखर है, मार्ग प्रशस्त है। चलना सबको है, चरैवति, चरैवति।


(-लेखिका पुलिस महानिरीक्षक, लखनऊ परिक्षेत्र, लखनऊ में तैनात हैं।) 

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