मुंह, शरीर के बाकी हिस्सों में प्रवेश का पहला द्वार होता है। मुंह में बड़ी संख्या में सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं, जो एक दूसरे के साथ तालमेल बना कर रहते हैं। लेकिन अगर मुंह के भीतर का यह संतुलन बिगड़ जाता है, तो इससे मसूड़ों में संक्रमण और सूजन पैदा हो जाती है और फिर इसी से हृदय रोग, कैंसर, यकृत और गुर्दे की गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो सकता है। अध्ययन में हमने पाया कि धूम्रपान नहीं करने वालों और करने वालों के मुंह में मौजूद बैक्टीरिया में स्पष्ट अंतर था। धूम्रपान करने वालों के मुंह में फ्युसोबैक्टीरियम, कैम्पिलोबैक्टर और टैनेरेला फोर्सिथिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया बहुत ज्यादा थे।
तंबाकू और सिगरेट में कई जहरीले पदार्थ होते हैं। इनमें निकोटीन, रेडियोधर्मी रसायन, सीसा और अमोनिया आदि प्रमुख हैं। जैसे ही सिगरेट पी जाती है, ये रसायन मुंह में चले जाते हैं और ऑक्सीजन के स्तर को कम करके अम्लता का स्तर बढ़ा देते हैं और लार के पर्याप्त उत्पादन को रोक कर मुंह के भीतर का वातावरण बदल देते हैं। सूखे मुंह के साथ-साथ मुंह में ऑक्सीजन का स्तर कम होने से हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इन सूक्ष्म जीवों की अत्यधिक वृद्धि सामान्यतः दांतों, जीभ और तालू की सतहों पर पाए जाने वाले स्वस्थ जीवाणुओं के संतुलन को नष्ट कर देती है। सिगरेट में पाया जाने वाला निकोटीन पी. जिंजिवालिस जैसे हानिकारक जीवाणुओं की सतह पर प्रोटीन की संख्या बढ़ा देता है। हानिकारक बैक्टीरिया के ये असामान्य झुंड हमारे मुंह की प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट करने लगते हंै। इससे सूजन हो सकती है, इलाज बेअसर हो सकता है और यहां तक कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध भी पैदा हो सकता है। इससे दांतों में सड़न, क्षय और यहां तक कि मुंह का कैंसर भी हो सकता है। अच्छी खबर यह है कि इन्हें रोका जा सकता है और जोखिम कम किया जा सकता है, हालांकि इसमें समय लग सकता है। इसलिए सरकारों और डब्ल्यूएचओ जैसे संगठनों को खासतौर से युवाओं के बीच धूम्रपान के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। -साथ में ग्लेंडा नैरी डेविसन एवं टैंडी मैत्शा इरेसमस (द कन्वर्सेशन से)