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मोदी के भरोसे शिवराज!

तवलीन सिंह Updated Sun, 28 Oct 2018 07:26 PM IST
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तवलीन सिंह

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में केंद्र सरकार के आला अधिकारी मिलते तो बहुत हैं, लेकिन अक्सर अपने काम के बारे में बातें करना वे पसंद नहीं करते। सो, मुझे अच्छा लगा, जब कुछ हफ्ते पहले मुझे ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुख्य सचिव अमरजीत सिन्हा ने कहा, ‘आप मध्य प्रदेश जा रही हैं, तो हमारे उन घरों को जरूर देख आना, जो हम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना रहे हैं।’ अपने मोबाइल पर मुझे उन्होंने सुंदर घरों के कुछ चित्र दिखाए यह विश्वास दिलाने के लिए कि इस योजना के तहत वास्तव में अच्छे घर बन रहे हैं। मैंने ऐसी आवास योजनाएं पहले भी बहुत देखी हैं, जिनमें घरों के नाम पर चारदीवारी डब्बे बनते थे, जो पहली बरसात में खंडहर बन जाते थे।



सो इंदौर जाने से पहले मैंने सचिव साहब से उन गांवों के नाम मांगे, जिनमें इस नई आवास योजना के तहत घर बन रहे थे। मैं आने वाले चुनाव की हवा परखने मध्य प्रदेश गई थी, लेकिन समय निकाल कर मैंने उन गांवों का भी दौरा किया, जिनके नाम मुझे दिए गए थे। पहले दिन मैं पेडमी गांव गई, जहां मंत्रालय की सूची के मुताबिक, 180 घरों का निर्माण उन लोगों के लिए हो रहा है, जो वर्षों से कच्चे घरों में रह रहे थे।


उस गांव में जाकर मैं बहुत निराश हुई। जिन घरों को मैंने देखा, उनकी छतें इतनी कच्ची थीं कि एक बारिश होने के बाद उनमें से पानी टपकने लग गया था। जिन गरीबों के घर थे, उन्होंने डरते-डरते अपने नाम बताए बिना कहा कि सरकार से उनके खातों में जो पैसा मिला था, उसका अधिकतर हिस्सा सरपंच खा गया था और बिना सरियों की छतें डाली थीं। उस शाम इंदौर के भाजपा कार्यालय में जब मैं सरपंच से मिली, तो उसने इन बातों को झूठ बताया और कहा, 'आदिवासी बेल्ट है जी। पैसा निकाल कर खा-पी लेते हैं।’


अगले दिन मैंने शिवनी गांव का रुख किया। उस दिन मेरी टैक्सी का ड्राइवर कांग्रेस समर्थक था, जिसने खुशी से मुझे बताया कि अमित शाह की हाल में हुई रैली फ्लॉप रही थी और शिवराज सिंह चौहान इस बार पक्का हारने वाले हैं। ‘कोई घर-वर नहीं बन रहे हैं जी, सब जुमले हैं', उसने कहा। पेडमी का अनुभव ध्यान में रखते हुए मैं शिवनी के घर देखने गई, तो हैरान रह गई। दलितों की बस्ती में मैंने बिल्कुल उस किस्म के घर देखे, जो सचिव साहब ने मुझे अपने फोन पर दिखाए थे। ऊपर से मैंने यह भी सुना कि हर घर के लिए सरकार एक लाख चालीस हजार रुपये देती है, जो सीधे उनके खातों में जाते हैं, जिनके घर बन रहे हैं। शिवनी के बाद मैं काचरोट गई, जहां उससे भी सुंदर घर देखने को मिले। पूछने पर मालूम हुआ कि इन घरों के लिए कुछ रुपये लाभार्थियों ने भी डाले थे, इसलिए वे ज्यादा अच्छे थे।


सो क्या मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार चौथी बार बनने जा रही है? क्या मोदी का जादू अभी तक चल रहा है? सच तो यह है कि मोदी का जो जादू हमने 2014 में देखा था, वह अब नहीं रहा है और न ही यह स्पष्ट है कि चौहान चौथी बार इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे।

 

इंदौर में लोगों में बेरोजगारी और डीजल-पेट्रोल के दामों को लेकर बहुत गुस्सा है। छोटे व्यापारी अभी तक नोटबंदी और जीएसटी की मार से निकल नहीं पाए हैं, सो ये भी मुद्दे होंगे। लेकिन यह भी कहना जरूरी है कि देहातों में मोदी सरकार की योजनाएं काफी सफल रही हैं और भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों के खाने के रास्ते काफी हद तक बंद हो गए हैं। सो चुनाव में क्या होने वाला है? मैं भविष्यवाणी करने को तैयार नहीं हूं।

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