अर्थशास्त्र से परास्नातक की डिग्री लेने के बाद मैं नौकरी करने के उद्देश्य से अमेरिका चली गई। यों तो मैं बंगलूरू की रहने वाली हूं, पर मेरी उच्च शिक्षा पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला से हुई है। अमेरिका जाने के बाद शुरुआती दौर में नौकरी नहीं मिली, तो मैंने वहां के एक डे-केयर सेंटर में काम करना शुरू कर दिया। इस दौरान मैंने वहीं की पार्क यूनिवर्सिटी की पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में शिक्षा के सिद्धांत व नीति पर पीएचडी में प्रवेश ले लिया।
शोध के दौरान मैं वहां बहुत सारे बेसहारा बच्चों से मिली, जिन्हें बुरी यातनाओं से गुजरना पड़ा था। वर्ष 1998 में जब मैं अपनी पीएचडी पूरी करने के बाद बंगलूरू लौटी, तो ऐसे बेसहारा बच्चों के लिए कुछ करने के बारे में सोचने लगी। हालांकि इसकी शुरुआत कहां से और कैसे हो, यह मुझे बिल्कुल पता नहीं था। मैंने इसके लिए नेशनल लॉ कॉलेज के उन छात्रों से बात की, जो किसी मामले में फंसने पर बेघर बच्चों के केस लड़ा करते थे। वहीं से मुझे इन बच्चों को शिक्षित करने का विचार मिला।