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हिंदुओं के करीब जाते शरीफ

Thu, 23 Mar 2017 07:33 PM IST
मरिआना बाबर
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मरिआना बाबर
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इस बार की होली पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को लंबे समय तक याद रहेगी, क्योंकि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उनकी नियति बदल दी। उन्होंने न केवल हिंदू विवाह विधेयक को कानून में बदल दिया, बल्कि स्पष्ट रूप से हिंदू समुदाय को बताया कि किसी पर अपना धर्म बदलने के लिए दबाव डालना एक अपराध है, जो पाकिस्तान के संविधान में भी स्थापित किया गया था। लंबे समय से पाकिस्तान में  अल्पसंख्यकों, यहां तक कि गैर-सुन्नी मुसलमानों पर  भी  हमले होते रहे हैं। पर जब पाकिस्तान बना था, तो असहिष्णु तत्व नहीं थे और जियो तथा जीने दो की नीति का पाकिस्तान के लोगों ने समर्थन किया था। लेकिन 'संकीर्ण मानसिकता' अब समाज पर हावी हो गई है।
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पाकिस्तान के निर्माण के बाद हिंदू विवाहों को कानूनी मान्यता नहीं दी गई, जिसके चलते हिंदू समुदायों के साथ संस्थागत भेदभाव हुआ। सरकार के निर्देशों पर राष्ट्रपति मनहून हुसैन ने अब हिंदू विवाह अधिनियम को लागू किया है, जो हिंदू विवाहों और परिवारों की रक्षा में सार्थक भूमिका निभाएगा। इस कानून में नाबालिगों के विवाह पर रोक लगाई गई है और शादी के अनुबंध के लिए 18 वर्ष की आयु निर्धारित की गई है। इसके अलावा यह कानून हिंदू समुदायों के रीति-रिवाजों और प्रथागत संस्कारों का भी संरक्षण करता है। यह वैधानिक अलगाव (तलाक) की अवधारणा भी पेश करता है। इसके अलावा हिंदू विवाहों से पैदा हुए बच्चों की वैधता को भी इसके तहत संरक्षित किया गया है। हिंदू महिलाएं अब अपने विवाह का दस्तावेजी प्रमाणपत्र पाने में सक्षम होंगी।

इसी महीने कुछ समय पहले नेशनल एसेंबली ने संशोधन के बाद हिंदू विवाह विधेयक, 2016 को पारित किया था। इस विधेयक को मानवाधिकार मंत्री कामरान माइकल ने सदन के समक्ष पेश किया था। माइकल ने कहा कि मानवाधिकार मंत्रालय ने मजहबी मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद मुल्क में अल्पसंख्यकों के हकों की हिफाजत की पहल की। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा एक सांविधानिक दायित्व था। अब तक मुल्क में हिंदू विवाहों और अन्य मामलों को पंजीकृत करने के लिए कोई कानून नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि सरकार महिलाओं और अल्पसंख्यकों के हकों समेत मानवाधिकार की रक्षा और उसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कानून बलूचिस्तान, पंजाब और खैबर पख्तुनख्वा प्रांतों में लागू होगा। सिंध प्रांत ने पहले ही हिंदू विवाह अधिनियम का अपना संस्करण लागू किया है।
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इस कानून को संबंधित मंत्रालयों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों से व्यापक सलाह-मशविरे के बाद अंतिम रूप दिया गया। मानवाधिकार मंत्रालय ने, जिसने इस विधेयक पर तीन वर्षों तक काम किया, प्रांतीय सरकारों से प्रस्ताव हासिल किया, ताकि पूरे मुल्क में इस कानून को लागू करना सुनिश्चित हो सके।

सबसे बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पहली बार कराची में होली समारोहों में शिरकत की और हिंदू समुदाय के लोगों को बताया कि इस्लाम शांति, प्रेम और मानवता का मजहब है, जो सभी मजहबों का सम्मान करना सिखाता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में कोई मजहबी विवाद नहीं है। यहां एक ही संघर्ष चल रहा है अच्छे और बुरे के बीच, प्रगतिशील और अतीतगामी तत्वों के बीच। उन्होंने हिंदुओं के कल्याण के लिए 50 करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की रक्षा और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए उनकी सरकार ज्यादा सख्त कानून बनाना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि होली रंगों का त्योहार है, जो हमें शांति और प्रेम का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि कुछ तत्व धार्मिक मतभेदों और विकृत इतिहास के जरिये पाकिस्तान को कमजोर करना चाहते हैं, पर मुल्क ने ऐसे प्रयासों को खारिज कर दिया है। धर्म के आधार पर समाज में दरार पैदा करने वाले तत्वों की लोगों के बीच कोई जगह नहीं थी। किसी को भी धार्मिक सहिष्णुता, एकता और मुल्क की प्रगति की राह में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार सभी मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों और अन्य इबादतगाहों की रक्षा करेगी।

दरअसल, पाकिस्तान में 2018 के मध्य में आम चुनाव होने वाले हैं। कई लोगों का कहना है कि अपने कार्यकाल के अंतिम समय में पाकिस्तान मुस्लिम लीग हिंदू समुदायों का वोट हासिल करने के लिए राजनीतिक साधनों के इस्तेमाल की कोशिश कर रही है।

सिंध के ग्रामीण इलाकों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का दबदबा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में हमेशा से एमक्यूएम का वर्चस्व रहा है। लेकिन आज पीपीपी बहुत कमजोर हो चुकी है और अगर मजबूत विरोधी हो, तो मुल्क से उसका सफाया हो सकता है। एमक्यूएम को कई गुटों में विभाजित कर दिया गया और इसके प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने इसे महत्वहीन बना दिया। कराची और सिंध के अन्य बड़े शहरों पर इस पार्टी की कोई पकड़ नहीं है। इमरान खान की पार्टी पीटीआई की शुरू में कराची में मौजूदगी दिखती थी और उसने कुछ सीटें भी जीतीं, पर आज वह कहीं नहीं है। इसी वजह से पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने सिंध के अंदर प्रचार शुरू कर दिया है। यहां तक कि नवाज शरीफ ने उन इलाकों का भी दौरा किया, जो लंबे समय से पीपीपी का गढ़ माने जाते रहे हैं।

लेकिन यदि भारत में नरेंद्र मोदी मुसलमानों का वोट पा सकते हैं और विकास का वायदा कर भाजपा अपनी नगण्य मौजूदगी वाले राज्य में विजेता बनकर उभर सकती है, तो विकास और दशकों से पीपीपी के बंधक बने लोगों को बेहतर जीवन का वायदा करके नवाज शरीफ भी ऐसा चमत्कार कर सकते हैं।
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